नई दिल्ली, 6 अक्टूबर। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों से कथित यौन दुर्व्यवहार के आरोपों का सामना कर रहे दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत को एडिशनल डीसीपी का ड्यूटी चार्ज सौंपा गया है। हालांकि, विवाद के बीच विवेक भगत ने जांच पूरी होने तक यह जिम्मेदारी संभालने से इनकार कर दिया है।
दिल्ली सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, विवेक भगत ने खुद अनुरोध किया है कि महिला पत्रकारों की ओर से लगाए गए कथित यौन हमले के आरोपों की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक उन्हें नया दायित्व न सौंपा जाए। उन्होंने जांच पूरी होने तक एडिशनल डीसीपी का ड्यूटी चार्ज ग्रहण नहीं करने की इच्छा जताई है।
आदेश पर दिल्ली सरकार ने दी सफाई
विवेक भगत को ड्यूटी चार्ज दिए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच दिल्ली सरकार ने पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेशों के 12 अधिकारियों को एडिशनल डीसीपी का ड्यूटी चार्ज देने की प्रशासनिक प्रक्रिया 25 अगस्त को ही शुरू हो गई थी।
सरकार ने कहा कि यह प्रक्रिया मौजूदा विवाद सामने आने से काफी पहले शुरू की गई थी। इसकी औपचारिक मंजूरी 5 अक्टूबर को मिली, जिसके बाद संबंधित आदेश जारी किया गया।
दिल्ली सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एडिशनल डीसीपी का यह ड्यूटी चार्ज अस्थायी व्यवस्था है। इसे नियमित पदोन्नति नहीं माना जाएगा और इसके तहत अधिकारियों को कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ भी नहीं मिलेगा।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित बदसलूकी और यौन हमले के गंभीर आरोप लगाए थे।
इन आरोपों में एक महिला पत्रकार ने एसीपी विवेक भगत पर भी सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामले को लेकर जांच फिलहाल जारी है। इसी बीच विवेक भगत को एडिशनल डीसीपी का ड्यूटी चार्ज दिए जाने के बाद विवाद और तेज हो गया। हालांकि, उन्होंने जांच पूरी होने तक यह जिम्मेदारी संभालने से इनकार कर दिया है।


