नई दिल्ली, 21 अगस्त। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पिछले माह जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल छात्र साहिल लोचब की शिकायत दर्ज कराने को लेकर शुक्रवार की दिल्ली पुलिस की जमकर थुक्का-फजीहत थी। नौबत यहां तक आ गई कि कांग्रेस नेता एफआईआर दर्ज करने की मांग लेकर थाने के ही बाहर धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद राहुल की बहन व कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी वहां जा पहुंचीं। अंततः पांच घंटे की पंचायत के बाद साहिल की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई।
साहिल की FIR दर्ज हुई। यह न्याय की तरफ़ पहला क़दम है।
पर सोचिए – एक FIR लिखने की इजाज़त तक गृह मंत्रालय से आनी पड़ी। अब समझ आया कि न्याय पर लगाम किसने लगा रखी है। pic.twitter.com/nvTwbEmplt
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दरअसल, राहुल घायल छात्र साहिल लोचब को लेकर शिकायत दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे। जब थाने में उनकी शिकायत नहीं दर्ज की गई तो वह सीधा डीसीपी से मिलने पहुंचे। इसके बाद वह थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। उनके साथ साहिल का परिवार भी था। बाद में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी धरने में शामिल हो गईं। अंतत: पांच घंटे के धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी की मांग मान ली और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।
शांतिपूर्ण… pic.twitter.com/on2uKkNeUM
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साहिल के शरीर के अंदर 200 से ज्यादा छर्रे और तीन छर्रे आंख में
इससे पहले थाने में राहुल गांधी ने कहा, ‘20 जुलाई को कनॉट प्लेस में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। एम्स की रिपोर्ट साफ कहती है कि साहिल के शरीर के अंदर 200 से ज्यादा छर्रे हैं और तीन छर्रे उनकी आंख में हैं। उनकी उस आंख की रोशनी चली गई है। उनके दिल के पास भी छर्रे हैं, जिन्हें छुआ नहीं जा सकता।

धरने के बीच बोले राहुल – ‘जब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो जाती, हम यहां से नहीं हटेंगे’
राहुल ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसने पैलेट गन नहीं चलाई। तो, बस एक ही सवाल है : किसी ने तो ऐसा किया ही होगा… अपराध तो हुआ ही है… हम मांग कर रहे हैं कि एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें ऊपर से आदेश मिला है और वे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते। जब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो जाती, हम यहां से नहीं हटेंगे… हम बस इस परिवार के लिए न्याय चाहते हैं… इस देश में, अमित शाह का गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के लोग न्याय नहीं होने देंगे..।’
साहिल की FIR दर्ज न होने देने का एक ही मतलब है –
नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर खुलेआम पैलेट गन चलाई जा सकती है, मगर उन्हें इंसाफ नहीं मिल सकता।
जब तक FIR दर्ज नहीं होती, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता – हम डटे… pic.twitter.com/iJ6ojC9mmA
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राहुल गांधी ने इसी क्रम में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में पुलिस उपायुक्त (DCP) के ऑफिस में दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कथित पुलिस काररवाई और 20 जुलाई को नीट में गड़बड़ियों को लेकर हुए कथित बल प्रयोग और प्रदर्शन सहित छात्र प्रदर्शन पर शिकायत दर्ज करने की मांग की।

इससे पहले गत 25 जुलाई को राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला किया था और उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस काररवाई और बहुत ज्यादा बल प्रयोग के, जिसमें कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल भी शामिल है, लिए व्यक्तिगत जिम्मेदार ठहराया था।
सुप्रीम कोर्ट ने गठित की है 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने पांच-सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति (एचपीईसी) बनाई है। इसकी अध्यक्षता पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। यह समिति 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ज्यादती के आरोपों की जांच करेगी। ये छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के कारण तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
जस्टिस रेड्डी की अध्यक्षता वाली समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई सदस्य के तौर पर शामिल हैं।


