प्रज्ञानानंद ने रचा इतिहास, कारुआना को हराकर ग्रैंड चेस टूर खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने

सेंट लुई (अमेरिका), 28 अगस्त। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंद ने 64 खानों पर बिछाई जाने वाली दिमागी बिसात यानी शतरंजी दुनिया के इतिहास में गुरुवार को नए अध्याय का सृजन किया, जब उन्होंने ग्रैंड फाइनल में अमेरिकी GM फैबियानो कारुआना को हराया और ग्रैंड शतरंज टूर (GCT) का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए गए।

पहले GCT खिताब के साथ 2 लाख अमेरिकी डॉलर पर भी अधिकार

सेंट लुई चेस क्लब में प्रज्ञानानंद ने छह अंकों से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की और अंततः कारुआना को 15-13 से हराकर अपना पहला GCT खिताब जीता। इसके साथ ही उन्हें विजेता के रूप में दो लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि मिली।

क्या संघर्ष था और चैंपियन बनने का क्या शानदार अंदाज था!

ग्रैंड चेस टूर के आधिकारिक हैंडल ने ‘X’ पर प्रज्ञानानंद को बधाई देते हुए लिखा, ‘प्रज्ञानानंद को अपना पहला ग्रैंड चेस टूर खिताब जीतने पर बधाई! प्रैग ने रोमांचक फाइनल मुकाबले में फैबियानो कारुआना को हराकर शानदार सत्र का अंत किया और पहली बार GCT चैंपियन बने!क्या वापसी थी, क्या संघर्ष था और चैंपियन बनने का क्या शानदार अंदाज था!’

इस खिताबी जीत ने प्रज्ञानानंद के साथ कारुआना और एक अन्य अमेरिकी खिलाड़ी वेस्ली सो के लिए अगले वर्ष के ग्रैंड चेस टूर में जगह भी सुनिश्चित कर दी। वेस्ली सो ने जर्मनी के विंसेंट कीमर को 18-12 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया।

प्रज्ञानानंद ने Chess.com से कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं लगा था कि आज मेरे पास ज्यादा मौके हैं। फाबी के खिलाफ एक जीत हासिल करना भी हर दिन संभव नहीं होता, लेकिन रैपिड में दो जीत हासिल करना महत्वपूर्ण था।’

6 अंकों से पिछड़ने के बाद रैपिड व ब्लिट्ज गेमों में की असाधारण वापसी

पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद के मार्गदर्शन में आगे बढ़े चेन्नई के इस 21 वर्षीय खिलाड़ी ने दिन की शुरुआत कारुआना से छह अंक पीछे रहकर की थी। लेकिन उन्होंने असाधारण प्रदर्शन करते हुए दोनों रैपिड मुकाबले जीत लिए और दो अंकों की बढ़त हासिल कर ली। रैपिड में प्रत्येक जीत के लिए चार अंक मिलते हैं। इसके बाद ब्लिट्ज के चार मुकाबलों में दोनों खिलाड़ियों ने एक-एक गेम जीता जबकि दो मुकाबले ड्रॉ रहे।

रैपिड मुकाबलों के अंत में मिली दो अंकों की बढ़त अंततः प्रज्ञानानंद के लिए निर्णायक साबित हुई। ब्लिट्ज का पहला गेम ड्रॉ रहा जबकि दूसरे गेम में कारुआना ने जीत दर्ज कर स्कोर 12-12 से बराबर कर दिया।

इसके बाद दृढ़ निश्चय के साथ खेलते हुए प्रज्ञानानंद ने तीसरा गेम जीत लिया और अपनी दो अंकों की बढ़त फिर से हासिल करते हुए स्कोर 14-12 कर दिया। अगर कारुआना अंतिम ब्लिट्ज गेम जीत जाते तो दो और मुकाबले खेलने पड़ते, जिसके बाद विशेष टाइम कंट्रोल के तहत आर्मागेडन मुकाबला होता। हालांकि, प्रज्ञानानंद के लिए अंतिम गेम में ड्रॉ ही खिताब जीतने के लिए पर्याप्त था और उन्होंने ड्रॉ हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली।

नॉर्वे चेस खिताब जीतकर भी रचा था इतिहास

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष की शुरुआत में प्रज्ञानानंद ने नॉर्वे चेस का खिताब जीतकर भी इतिहास रचा था। वह नॉर्वे चेस जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। इस अभियान के दौरान उन्होंने विश्व नंबर एक और टूर्नामेंट के प्रबल दावेदार मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया था।

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