PM Modi Subhashit: पीएम मोदी ने शेयर किया संस्कृत श्लोक, दिया आत्मसम्मान और पुरुषार्थ का संदेश

नई दिल्ली,18 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने आत्मसम्मान, साहस, स्वाभिमान और पुरुषार्थ के महत्व का संदेश दिया। पीएम मोदी पिछले कुछ दिनों से लगातार संस्कृत के सुभाषित साझा कर रहे हैं और उनके माध्यम से देशवासियों को प्रेरक संदेश दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने मंगलवार को लिखा…
“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥”
इस सुभाषित का भावार्थ है कि मनुष्य को हमेशा आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान के साथ जीवन जीना चाहिए। सच्चा पुरुषार्थ और पराक्रम इसी में है कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता न करे। कठिन परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, व्यक्ति को सत्य, धैर्य और आत्मगौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहना चाहिए।

एकता और सामूहिक संकल्प का दिया संदेश

इससे एक दिन पहले, सोमवार को भी प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है। यही भावना भारत की प्रगति और समृद्धि की मजबूत नींव है।
इसके साथ उन्होंने लिखा-
“समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः।समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥”
इसका भावार्थ है कि सभी लोगों के संकल्प एक समान हों और उनके हृदय एकता की भावना से जुड़े रहें। आपसी सहयोग और समान व्यवहार के जरिए समाज की उन्नति के लिए लगातार प्रयास करना ही सामूहिक शक्ति का आधार है।

14 अगस्त को भी साझा किया था सुभाषित

इससे पहले 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक सुभाषित साझा किया था। उन्होंने विभाजन की त्रासदी झेलने वाले लोगों को नमन करते हुए कहा था कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लोगों ने अपने साहस और सामर्थ्य से देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया।

पीएम मोदी ने उस अवसर पर लिखा था कि देशवासियों को सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और मजबूत करना चाहिए। उन्होंने इसके साथ यह श्लोक साझा किया था—
“उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

इसका भावार्थ है कि परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही कला, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार का विकास होता है। सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति को केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री के लगातार साझा किए जा रहे इन सुभाषितों में पुरुषार्थ, आत्मसम्मान, एकता, परिश्रम और राष्ट्र निर्माण जैसे विचारों पर विशेष जोर दिखाई देता है।

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