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PM मोदी ने X पर साझा किया संस्कृत सुभाषित, बोले- एकता और समान संकल्प से हर लक्ष्य होगा हासिल

PM मोदी ने X पर साझा किया संस्कृत सुभाषित, बोले- एकता और समान संकल्प से हर लक्ष्य होगा हासिल

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नई दिल्ली, 30 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए देशवासियों को एकता, समान विचार और साझा संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब लोगों के विचार, संकल्प और भावनाएं एक दिशा में होती हैं, तब किसी भी लक्ष्य को हासिल करना आसान हो जाता है।

पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा, “जब हमारे संकल्प, विचार और मन की भावनाएं एक होती हैं, तब हर कार्य सफल होता है। आइए, एकजुटता के साथ आगे बढ़ें और मिलकर भारतवर्ष के हर लक्ष्य को हासिल करें।” इसके साथ उन्होंने संस्कृत का प्रसिद्ध श्लोक भी साझा किया…

“समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्।
समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि॥”

इस श्लोक का हिंदी अर्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे संकल्प समान हों, हमारी सभा एक हो तथा हमारे हृदय और विचारों में एकता हो। इसी भावना के साथ किए गए सामूहिक प्रयास सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

एक दिन पहले भी दिया था सांस्कृतिक सम्मान का संदेश

इससे पहले सोमवार को भी प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया था। उन्होंने लिखा कि दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। उन्होंने यह श्लोक साझा किया—

“देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः।
स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥”

इसका हिंदी अर्थ है कि जो व्यक्ति विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और सामाजिक नियमों को समझता है, उसमें सही-गलत का विवेक विकसित होता है। ऐसा व्यक्ति जहां भी जाता है, वहां सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।

26 जून को भी साझा किया था एकता का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले 26 जून को भी संस्कृत सुभाषित के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का संदेश दे चुके हैं। उन्होंने ऋग्वेद का प्रसिद्ध मंत्र साझा किया था—

“सङ्गच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे, सञ्जानाना उपासते॥”

इस श्लोक का अर्थ है कि हम सभी साथ चलें, एक स्वर में संवाद करें और हमारे विचार एक हों। जिस प्रकार देवता एकमत होकर अपने कर्तव्यों का पालन करते थे, उसी तरह हमें भी एकता, समन्वय और सौहार्द के साथ कार्य करना चाहिए।

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