नई दिल्ली, 26 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान आज भी करोड़ों लोगों को सत्य, न्याय और साहस के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि मानवता के लिए अमर संदेश है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा कि “हजरत इमाम हुसैन का बलिदान अनगिनत लोगों को सत्य और न्याय की राह पर डटे रहने की प्रेरणा देता है। उनकी शहादत साहस, दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास की अमर शक्ति की याद दिलाती है।”
कर्बला की शहादत बनी इंसानियत की मिसाल
हजरत इमाम हुसैन, इस्लाम के पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे तथा हजरत अली और हजरत फातिमा के छोटे पुत्र थे। इस्लामिक इतिहास में उनका स्थान अत्यंत सम्मानित माना जाता है। साल 680 ईस्वी (61 हिजरी) में कर्बला के मैदान में उन्होंने अत्याचारी शासक यजीद की बैअत (सत्ता स्वीकार करने) से इनकार कर दिया। इसके बाद अपने परिवार और 72 वफादार साथियों के साथ तीन दिनों तक भूखे-प्यासे रहने के बावजूद उन्होंने अन्याय के सामने झुकने के बजाय शहादत को स्वीकार किया।
सत्य और न्याय की लड़ाई का प्रतीक
कर्बला की घटना आज भी अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। हजरत इमाम हुसैन का बलिदान केवल मुस्लिम समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए सत्य, न्याय, साहस और इंसानियत की रक्षा का प्रेरणास्रोत है। सदियों बाद भी उनकी कुर्बानी लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और सच्चाई के रास्ते पर अडिग रहने का संदेश देती है। यही कारण है कि दुनिया भर में उनकी शहादत को सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।

