लखनऊ, 29 सितम्बर। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए राज्यभर में अब होटल, रेस्तरां, कैफे में हुक्का बार पर प्रतिबंध लगा दिया है। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस एके चौधरी की पीठ ने हुक्का बार चलाने से जुड़ी मुख्य याचिका समेत सभी संबद्ध याचिकाओं को खारिज करते हुए यह आदेश दिया।
स्मोकिंग एरिया में भी Hookah Bars नहीं चल सकते
कोर्ट ने यह भी कहा कि होटल, रेस्तरां व कैफे सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर डिजाइनेटेड स्मोकिंग जोन में भी ग्राहकों को हुक्का नहीं दिया जा सकेगा। पीठ ने कहा कि यह गतिविधि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008 के तहत प्रतिबंधित है।
याचिकाकर्ताओं ने स्मोकिंग जोन में हुक्का परोसने की अनुमति मांगी थी
याचिकाकर्ताओं ने उन रेस्टोरेंट के लिए तय स्मोकिंग जोन में हुक्का परोसने की अनुमति मांगी थी, जिनके पास वैध फूड एस्टेब्लिशमेंट लाइसेंस हैं। साथ ही याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से अपने कामकाज में पुलिस का दखल रोकने का अनुरोध किया था। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि तय स्मोकिंग जोन सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर लगी रोक का बस एक सीमित अपवाद है। ऐसे जोन में कोई सेवा देने की अनुमति नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हाई कोर्ट ने गौर किया कि नियमों में 2017 के संशोधन के बाद ‘कोई अन्य सेवा’ (any other service) शब्द को बदलकर ‘कोई भी सेवा’ (any service) कर दिया गया था। इससे यह साफ हो गया कि हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, जलता हुआ कोयला रखना, ग्राहक को परोसना या कोयला बदलना जैसी गतिविधियां सेवा देने के दायरे में आती हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि यदि तैयार हुक्का किसी ग्राहक को दिया जाता है और वह खुद उसका इस्तेमाल करता है तो इसे सेवा देने के बजाय उपकरण किराए पर देना माना जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि हुक्का तैयार करने और परोसने में सेवा का तत्व शामिल है। बेंच ने कहा कि सिर्फ इस बात से कि ग्राहक खुद हुक्का चलाता है, गतिविधि की कानूनी प्रकृति नहीं बदलती…। कोर्ट ने साफ किया कि फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट और नगर निगम अधिकारियों के पास हुक्का बार चलाने के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। साथ ही कानूनी प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को COTPA के तहत तलाशी लेने, जब्ती करने और दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है।
रेस्टोरेंट में हुक्का देना, लागू कानूनी प्रावधानों का साफ उल्लंघन
बेंच ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर साफ हवा में सांस लेने का नॉन-स्मोकर्स का मौलिक अधिकार, उन बिजनेस के अधिकार से ज्यादा अहम है, जो प्रतिबंधित स्मोकिंग वाली गतिविधियां करते हैं। कोर्ट ने माना कि हुक्का बार चलाना और रेस्टोरेंट में हुक्का देना, लागू कानूनी प्रावधानों का साफ उल्लंघन है। इसी के साथ सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए पीठ ने आदेश दिया कि उसके फैसले की एक कॉपी जरूरी काररवाई के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजी जाए।
बेंच ने हुक्का व तंबाकू पीने से सेहत को होने वाले खतरों पर भी बात की
इसी क्रम में अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार अपने फैसले के आखिर में बेंच ने कानूनी सवाल से आगे बढ़कर हुक्का और तंबाकू पीने से सेहत को होने वाले खतरों पर बात की। कोर्ट ने बताया कि लगभग एक घंटे के हुक्का सेशन में अंदाजन 200 कश (Puffs) लिए जाते हैं। यह 100 सिगरेट पीने जितना ही नुकसानदायक है। कोर्ट ने इस गलतफहमी को भी खारिज कर दिया कि हुक्का सिगरेट से कम नुकसानदायक है। अदालत ने कहा कि हुक्का की लत लग सकती है। यह नुकसानदायक है। इसमें सिगरेट की तरह ही जहरीले केमिकल होते हैं।
100 सिगरेट पीने जितना ही नुकसानदायक है हुक्का
कोर्ट ने कहा, ‘हुक्का भी 100 सिगरेट पीने जितना ही नुकसानदायक है। यह एक गलतफहमी है कि हुक्का सिगरेट से कम नुकसानदायक है। हुक्का भी सिगरेट की तरह ही लत लगाने वाला और नुकसानदायक है। इसमें सिगरेट की तरह ही जहरीले केमिकल होते हैं। इसके अलावा, सिगरेट के हर पैकेट पर कानूनी तौर पर जरूरी स्वास्थ्य चेतावनी होती है। हुक्के के मामले में भी ऐसी ही चेतावनी की जरूरत है ताकि उस कानूनी कमी को पूरा किया जा सके, जिस पर तुरंत विधायी ध्यान देने की जरूरत है।’


