दिल्ली हाईकोर्ट से जवाद सिद्दीकी को आंशिक राहत, पत्नी से मिलने के लिए 3 दिन की कस्टडी पैरोल

नई दिल्ली, 16 जुलाई। दिल्ली हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को बड़ी लेकिन सीमित राहत देते हुए कैंसर पीड़ित पत्नी से मिलने के लिए तीन दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर कर ली है। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत लागू कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने सिद्दीकी को 21, 23 और 25 जुलाई को निर्धारित समय के लिए पुलिस अभिरक्षा (कस्टडी) में अपनी पत्नी उस्मा अख्तर से मिलने की अनुमति दी है। उनकी पत्नी स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं। सिद्दीकी ने पत्नी की देखभाल के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। सिद्दीकी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने पैरवी की, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन अदालत में पेश हुए। ईडी ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अपराधों से जुड़ा है और याचिकाकर्ता को राहत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

पहले भी खारिज हो चुकी थी जमानत याचिका

इससे पहले साकेत स्थित विशेष अदालत ने भी 9 जून को सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि उनकी पत्नी स्टेज-4 कैंसर से पीड़ित जरूर हैं, लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड में ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है, जिसके आधार पर अंतरिम जमानत दी जा सके। अदालत ने यह भी माना था कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार उनकी बीमारी स्थिर है और उपचार का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।

क्या हैं ईडी के आरोप?

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। आरोप है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने एनएएसी (NAAC) की समाप्त हो चुकी मान्यता को वैध बताकर प्रस्तुत किया और ऐसी यूजीसी (UGC) मान्यता का दावा किया जो वास्तविक रूप से अस्तित्व में नहीं थी। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मंजूरी हासिल करने में कथित अनियमितताएं करने के भी आरोप हैं। ईडी का दावा है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2024-25 के बीच करीब 493.24 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस धन को जवाद अहमद सिद्दीकी और उनके परिवार से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित किया गया।

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