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आज़म खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 40 में से 38 इमारतें अवैध घोषित, RDA ने जारी किया ध्वस्तीकरण आदेश

रामपुर, 16 जुलाई। उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए परिसर की 38 इमारतों को अवैध घोषित कर उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) का कहना है कि इन भवनों का निर्माण बिना वैध भवन मानचित्र की स्वीकृति के कराया गया था। यह यूनिवर्सिटी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाती है।

आरडीए ने यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत की है। आदेश जारी करने से पहले यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद प्राधिकरण ने निर्माण को नियमों के विपरीत माना। रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में पाया गया कि परिसर में कई इमारतों के निर्माण के लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति उपलब्ध नहीं है।

यूनिवर्सिटी ने क्या दी दलील?

सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कहा कि जब इन इमारतों का निर्माण हुआ था, तब सिंगनखेड़ा गांव रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। इसलिए उस समय आरडीए से भवन निर्माण की अनुमति लेना आवश्यक नहीं था। प्रबंधन ने यह भी तर्क दिया कि पहले से बने भवनों को बाद में लागू नियमों के आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता।

RDA ने दलीलें क्यों खारिज कीं?

रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण के समय जिस सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना आवश्यक था, उसकी मंजूरी लेना अनिवार्य था। बाद में क्षेत्र आरडीए के अधीन आने से इस कानूनी जिम्मेदारी में कोई बदलाव नहीं होता। जांच में यह भी सामने आया कि जिला पंचायत के रिकॉर्ड में केवल मेडिकल कॉलेज और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे ही स्वीकृत मिले हैं। इसके अलावा परिसर की अन्य 38 इमारतों के लिए कोई वैध स्वीकृति या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

लंबे समय से विवादों में है यूनिवर्सिटी

साल 2006 में विशेष कानून के तहत स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से भूमि अतिक्रमण, जमीन खरीद-फरोख्त और लीज नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामलों को लेकर विवादों में रही है। इसी बीच, वर्ष 2026 की शुरुआत में आज़म खान और उनके परिवार ने यूनिवर्सिटी का संचालन करने वाले ट्रस्ट से खुद को औपचारिक रूप से अलग कर लिया था।

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