नई दिल्ली, 20 सितंबर। आज की व्यस्त जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करने के कारण शरीर के कई हिस्सों में अकड़न और खिंचाव महसूस हो सकता है। खासकर हैमस्ट्रिंग, पीठ, कंधे और अंदरूनी जांघों की मांसपेशियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में नियमित योग और स्ट्रेचिंग शरीर के लचीलेपन को बनाए रखने में मदद कर सकती है। पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन (Pad Prasar Paschimottanasana) बैठकर किया जाने वाला एक योगासन है, जिसमें दोनों पैरों को फैलाकर आगे की ओर झुकना होता है। यह पश्चिमोत्तानासन का एक अलग रूप है और इसमें पैरों के बीच का अंतर अधिक रखा जाता है। इससे पैरों के पीछे और अंदरूनी हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है।
क्या है पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन?
आयुष मंत्रालय के योग संबंधी विवरण के अनुसार, पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन में पैरों को फैलाकर बैठने के बाद धड़ को आगे की ओर झुकाया जाता है। इसका नाम संस्कृत के शब्दों ‘पाद’ (पैर), ‘प्रसार’ (फैलाना), ‘पश्चिम’ (शरीर का पिछला भाग), ‘उत्तान’ (खींचना या विस्तार) और ‘आसन’ (मुद्रा) से बना है। सामान्य पश्चिमोत्तानासन में दोनों पैर एक साथ रखे जाते हैं, जबकि पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन में पैरों को अलग-अलग फैलाकर आगे झुकने का अभ्यास किया जाता है।
हैमस्ट्रिंग की स्ट्रेचिंग में मदद
इस आसन में आगे की ओर झुकते समय जांघों के पीछे मौजूद हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों में खिंचाव आता है। नियमित और सही तरीके से किए गए स्ट्रेचिंग अभ्यास से मांसपेशियों के लचीलेपन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक बैठने वाले लोगों में पैरों के पीछे खिंचाव या जकड़न महसूस हो सकती है। ऐसे में अपनी क्षमता के अनुसार किया गया यह स्ट्रेच उपयोगी हो सकता है।
अंदरूनी जांघों और ग्रोइन पर भी पड़ता है असर
पैरों को फैलाकर आगे झुकने के कारण इस आसन में अंदरूनी जांघों और ग्रोइन क्षेत्र की मांसपेशियों में भी खिंचाव आता है। अंदरूनी जांघों में मौजूद एडिक्टर मांसपेशियां पैरों की गति और स्थिरता में भूमिका निभाती हैं। लगातार बैठे रहने या शारीरिक गतिविधि कम होने पर कुछ लोगों को इन मांसपेशियों में जकड़न महसूस हो सकती है। रनिंग, साइकिलिंग या जिम जैसी गतिविधियां करने वाले लोगों के लिए भी नियमित स्ट्रेचिंग शरीर की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकती है।
कैसे करें पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन?
- जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को अपनी सुविधा के अनुसार सामने की ओर फैलाएं।
- पैरों को जरूरत से ज्यादा चौड़ा न करें।
- रीढ़ को सीधा रखते हुए सांस लें।
- सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे धड़ को आगे की ओर झुकाएं।
- अपनी क्षमता के अनुसार हाथों को आगे ले जाएं।
- घुटनों को जबरदस्ती सीधा रखने या शरीर को नीचे दबाने की कोशिश न करें।
- कुछ समय आरामदायक स्थिति में रुकें और फिर धीरे-धीरे शुरुआती अवस्था में लौटें।
इन बातों का रखें ध्यान
योगासन करते समय शरीर को अपनी क्षमता से अधिक खींचना नहीं चाहिए। खासकर शुरुआत में जितना सहज रूप से झुक पाएं, उतना ही करें। दर्द होने पर मुद्रा को जारी रखने के बजाय रुक जाना बेहतर है। स्लिप डिस्क, साइटिका या कमर के निचले हिस्से में गंभीर दर्द जैसी समस्या होने पर इस आसन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ की सलाह लें। किसी चोट या पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में बिना विशेषज्ञ की सलाह के योगासन न करें।


