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मन की बात: पीएम मोदी ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियां, C-295 विमान से लेकर स्वदेशी युद्धपोत और योग की सफलता का किया जिक्र

मन की बात: पीएम मोदी ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियां, C-295 विमान से लेकर स्वदेशी युद्धपोत और योग की सफलता का किया जिक्र

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नई दिल्ली, 28 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में आत्मनिर्भर भारत अभियान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश लगातार रक्षा, विमानन और विनिर्माण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने भारत में निर्मित C-295 सैन्य परिवहन विमान की पहली सफल उड़ान को देश की वैमानिकी क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जून महीने में भारत ने विमानन क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि C-295 विमान अब भारत में ही तैयार किया जा रहा है और ऐसे 40 विमान देश में निर्मित किए जाएंगे, जिससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा वैमानिकी उद्योग को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए खरीदे जा रहे 56 C-295 विमानों में से 40 का निर्माण गुजरात के वडोदरा स्थित संयंत्र में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस के सहयोग से किया जा रहा है। भारत में बने पहले C-295 विमान ने 10 जून को सफलतापूर्वक अपनी पहली उड़ान भरी थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नौसेना की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आईएनएस दूनागिरि, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि इन युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह स्वदेशी है, जो भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता का प्रमाण है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने 21 जून को मनाए गए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दुनिया के 2,500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें करोड़ों लोगों ने भाग लिया। साथ ही अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने 102 स्वर्ण सहित कुल 114 पदक जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया।

मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा ‘शास्त्रार्थ’ की प्राचीन भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करने की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल अपने विचार रखने का माध्यम नहीं, बल्कि तर्क, संवाद और स्वस्थ विचार-विमर्श की अनुशासित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ लोगों को दूसरों के विचार धैर्यपूर्वक सुनने और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखने की सीख देता है। प्रधानमंत्री ने इस पहल को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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