भारतीय मूल के सर्जन ने बिना खोपड़ी खोले ब्रेन ट्यूमर हटाने की नई तकनीक विकसित की, मरीज 2 दिन में स्वस्थ
न्यूयॉर्क, 31 जुलाई। भारतीय मूल के अमेरिकी सेना के सर्जन मेजर जगतकुमार पटेल ने ब्रेन ट्यूमर के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अपने सहयोगी आर्मी न्यूरोसर्जन लेफ्टिनेंट कर्नल चार्ल्स मिलर के साथ मिलकर ऐसी नई सर्जिकल तकनीक विकसित की है, जिसमें मरीज की खोपड़ी खोले बिना नाक के रास्ते ब्रेन ट्यूमर को हटाया जा सकता है। पेंटागन के अनुसार, यह तकनीक कम चीर-फाड़ वाली (मिनिमली इनवेसिव) है और इससे मरीज तेजी से स्वस्थ होते हैं।
मेजर पटेल ने बताया कि पहले इस तरह के ट्यूमर को हटाने के लिए ओपन ब्रेन सर्जरी करनी पड़ती थी, जो काफी जटिल और जोखिमभरी होती थी। अब यदि ट्यूमर सही आकार और उपयुक्त स्थान पर हो, तो नाक के रास्ते सीधे उस तक पहुंचकर उसे सुरक्षित तरीके से निकाला जा सकता है। इस नई तकनीक का सफल इस्तेमाल हाल ही में अमेरिकी मरीन स्टाफ सार्जेंट एंडी आर्चर पर किया गया। पिछले 15 वर्षों से उन्हें लगातार तेज सिरदर्द की शिकायत थी। जब उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित होने लगी तो एमआरआई जांच में पिट्यूटरी ग्लैंड के सामने करीब 4.4 सेंटीमीटर का ट्यूमर मिला, जो ऑप्टिक नर्व पर दबाव डाल रहा था।
इसके बाद उन्हें बेथेस्डा स्थित वाल्टर रीड आर्मी नेशनल मेडिकल सेंटर लाया गया, जहां मेजर पटेल और चार्ल्स मिलर ने नाक के रास्ते ट्यूमर निकालने की इस नई प्रक्रिया को अपनाया। सर्जरी के दौरान मेजर पटेल ने एंडोस्कोपिक कैमरे की मदद से नाक के जटिल मार्ग से सुरक्षित रास्ता तैयार किया और हाई-डेफिनिशन तस्वीरें मॉनिटर पर दिखाई। इन स्पष्ट चित्रों की सहायता से लेफ्टिनेंट कर्नल मिलर ने ट्यूमर को पूरी तरह निकाल दिया। पटेल ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह कैमरे को और करीब ले जाकर सर्जन को प्रभावित हिस्से का बेहद स्पष्ट दृश्य उपलब्ध कराते हैं, जिससे ऑपरेशन अधिक सुरक्षित और सटीक हो जाता है।
सबसे खास बात यह रही कि ऑपरेशन के केवल दो दिन बाद ही एंडी आर्चर सामान्य स्थिति में दिखाई दिए। उनकी आंखों की रोशनी में सुधार होने लगा था और उनमें हाल ही में बड़ी ब्रेन सर्जरी होने जैसे कोई गंभीर लक्षण नहीं थे। मेजर पटेल का कहना है कि डिफेंस हेल्थ एजेंसी में उनकी टीम जैसी विशेषज्ञता बहुत कम देखने को मिलती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नाक के रास्ते की यह सर्जरी हर मरीज पर संभव नहीं होती। इसके लिए ट्यूमर का सही स्थान और आकार होना आवश्यक है।
