गुजरात ने बनाया नया रिकॉर्ड : एक वर्ष में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन घटाया

गांधीनगर, 25 अगस्त। रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन (नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन) के क्षेत्र में आज गुजरात न केवल देश का सबसे प्रमुख राज्य बनकर उभरा है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन एंड ग्रीन इंडिया’ विजन और 2070 तक ‘नेट जीरो’ के लक्ष्य को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि पश्चिमी राज्य ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कार्बन एमिशन में 49.79 मिलियन टन की कमी करके और रिकॉर्ड 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन इलेक्ट्रिसिटी बनाकर हरित विकास की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।

रिकॉर्ड 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन इलेक्ट्रिसिटी का उत्पादन

आंकड़ों के अनुसार बीते पांच वर्षों में राज्य कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में सफल रहा है। यह मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य में सोलर और विंड एनर्जी के विस्तार के लिए बनाई गईं नई ऊर्जा नीतियों और हरित निवेश को दिए जा रहे प्रोत्साहन की वजह से संभव हो पाया है।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना व पीएम कुसुम योजना की अहम भूमिका

नागरिकों को घरों पर रूफ टॉप सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रेरित करने वाली पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और किसानों को खेतों में सोलर पंप स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली पीएम कुसुम योजना के सफल कार्यान्यवयन ने भी गुजरात को एक प्रमुख ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इन योजनाओं से लाभार्थियों की बचत के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में विशेष योगदान दे रहा गुजरात

कुल मिलाकर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर गुजरात जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में अपना विशेष योगदान दे रहा है। साथ ही, सरकार की इंटीग्रेटेड आर पॉलिसी – 2026 और ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी के अलावा गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल), गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जीईडीए) और गुजरात पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीसीपीएल) जैसी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से राज्य न सिर्फ 2030 तक 100 गीगावाट (जीडब्ल्यू) रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है, बल्कि क्लीन एनर्जी, पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में एक मॉडल स्टेट बन रहा है।

गुजरात के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने बताया, ‘ग्रीन पावर जेनरेशन की वजह से हम 2025 – 2026 में 49.80 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम कर पाए हैं। हमने 67,655 मिलियन यूनिट बिजली का भी उत्पादन किया है।’

गुजरात में अभी 52 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का प्रोडक्शन हो रहा

वहीं गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की एमडी शालिनी अग्रवाल ने कहा, ‘रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन एनर्जी और हाइड्रोजन जैसी नई-नई पहलें पूरे गुजरात में बड़े पैमाने पर लागू की जा रही हैं। इन सबके चलते गुजरात अभी पूरे भारत में रिन्यूएबल एनर्जी में पहले नंबर पर है। गुजरात राज्य में अभी 52 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का प्रोडक्शन हो रहा है।’

एक लाभार्थी भरतभाई पढ़ियार ने कहा, ‘पहले मेरा बिजली बिल छह से सात हजार रुपये महीने आता था। इसके बाद हमने सोलर सिस्टम लगवाया, जिसमें हमें 50 प्रतिशत सब्सिडी मिली है, जिससे हमारे घर में टीवी, घंटी, पंखा और एसी भी चलता है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक ह्वीकल भी चार्ज हो जाता है। अब हमारा बिजली बिल जीरो हो गया है।’ एक अन्य लाभार्थी किसान खलपाभाई चौधरी ने कहा, ‘पहले हमें बिजली का बिल भरने के लिए जो पैसे देने पड़ते थे, उससे अब मुक्ति मिल गई है। हमें इस सोलर पंप से लगातार पानी मिल रहा है।’

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