लखनऊ, 7 सितंबर। कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के दिमाग में बर्गर, पिज्जा, समोसा और ज्यादा तेल में बनी चीजें आती हैं। यही वजह है कि कई लोग मानते हैं कि अगर वे सिर्फ घर का खाना खाते हैं तो उनका कोलेस्ट्रॉल कभी नहीं बढ़ सकता। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। घर का बना खाना निश्चित रूप से बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन कोलेस्ट्रॉल पर असर डालने वाले कई दूसरे कारक भी होते हैं। अगर डाइट ठीक होने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट लगातार ज्यादा आ रही है, तो वजन, शारीरिक गतिविधि, खाने की मात्रा और पारिवारिक इतिहास जैसे कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी, लेकिन एलडीएल बढ़ना परेशानी
कोलेस्ट्रॉल को पूरी तरह खराब मानना सही नहीं है। शरीर को इसकी कुछ मात्रा की जरूरत होती है और यह कई जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। समस्या तब पैदा होती है जब खून में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी एलडीएल (LDL) का स्तर जरूरत से ज्यादा हो जाता है। लंबे समय तक एलडीएल का स्तर अधिक रहने पर धमनियों में प्लाक जमा होने का खतरा बढ़ सकता है। इससे आगे चलकर हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।
सिर्फ घर का खाना खाना ही काफी नहीं
घर का खाना पौष्टिक हो सकता है, लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी मात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। घी, मक्खन, मलाई और कुछ पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक हो सकती है। इनका जरूरत से ज्यादा सेवन एलडीएल को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।इसलिए खाना घर का है या बाहर का, इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि खाना किस तरह तैयार किया जा रहा है और उसकी मात्रा कितनी है।
रोज पूरी-कचौड़ी या पकौड़े खाना पड़ सकता है भारी
पूरी, पकौड़े, कचौड़ी और दूसरे डीप-फ्राइड व्यंजन अगर कभी-कभार खाए जाएं तो स्थिति अलग है। लेकिन इन्हें रोज के भोजन का हिस्सा बनाना वजन और हृदय स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता। अगर ज्यादा कैलोरी वाले भोजन के साथ शारीरिक गतिविधि भी कम है, तो वजन बढ़ सकता है। बढ़ता वजन भी शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इसलिए संतुलित डाइट के साथ नियमित एक्टिविटी जरूरी है।
फाइबर वाली चीजों को डाइट में दें जगह
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए केवल तेल की मात्रा कम करना पर्याप्त नहीं है। डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, ओट्स, जौ, बीन्स और दालें शामिल करना भी जरूरी है। इन खाद्य पदार्थों में डाइटरी फाइबर पाया जाता है। खासतौर पर घुलनशील फाइबर एलडीएल को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं अगर रोज की डाइट में सब्जियां और फल कम हैं और मैदा, सफेद ब्रेड, बिस्किट व दूसरे पैकेज्ड फूड ज्यादा हैं, तो डाइट का संतुलन बिगड़ सकता है।
लंबे समय तक बैठे रहना भी है समस्या
अगर खाना घर का है लेकिन दिन का ज्यादातर समय बैठे-बैठे गुजरता है, तो केवल डाइट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित रखने और दिल की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई दूसरी शारीरिक गतिविधि रोज की दिनचर्या में शामिल की जा सकती है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बजाय पूरे दिन में अपनी गतिविधि बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।
जीन की वजह से भी बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल
हर व्यक्ति में हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह सिर्फ खराब डाइट या जीवनशैली नहीं होती। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का इतिहास रहा है या परिवार के कई सदस्यों में बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल पाया गया है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ आनुवंशिक स्थितियों में शरीर खून से एलडीएल को पर्याप्त मात्रा में हटाने में सक्षम नहीं होता। ऐसे मामलों में अच्छी डाइट लेने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल काफी ज्यादा रह सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच और उपचार के बारे में जानकारी लेना जरूरी है।


