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फ्रेंच ओपन चैम्पियन ज्वेरेव बोले- ‘यह जीत मेरे लिए काफी अहम, इसने मुझे अब थोड़ी आजादी दी’

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पेरिस, 7 जून। जर्मन दिग्गज अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने रोलां गैरो की उस लाल बजरीयुक्त सतह पर रविवार की देर शाम अपनी सबसे शानदार जीत हासिल की, जहां उन्हें पिछले 10 प्रयासों में कई बार दिल तोड़ने वाली हार का सामना करना पड़ा था।

वर्ष के दूसरे ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट यानी फ्रेंच ओपन के सवा चार घंटे तक खिंचे फाइनल में इतालावी फ्लेवियो कोबोली को पांच सेटों में हराकर करिअर की पहली मेजर ट्रॉफी जीतने के बाद ज्वेरेव ने माना, ‘यह ट्रॉफी मेरे लिए बहुत अहम है क्योंकि यदि मैं यह मैच हार जाता तो मेरा आत्मविश्वास बहुत कम हो जाता। लेकिन अब जब मैंने इसे जीत लिया है तो मुझे लगता है कि मैं इसे दोबारा कर सकता हूं।’

10 वर्षों के इंतजार व 41वें ग्रैंड स्लैम मेन ड्रॉ में मिली खिताबी सफलता

देखा जाए तो अपने 41वें ग्रैंड स्लैम मेन ड्रॉ और चौथे मेजर सिंगल्स फाइनल में 29 वर्षीय हैम्बर्गवासी के लिए किस्मत ने साथ दिया। क्ले कोर्ट पर गिरते ही उनके कंधों से एक भारी बोझ हट गया और उन्होंने उस पल का जश्न मनाया, जिसका इंतजार उन्हें 10 वर्षों से था।

‘अब चाहे कुछ भी हो, मैं हमेशा एक ग्रैंड स्लैम चैम्पियन रहूंगा

ज्वेरेव ने कहा, ‘अब चाहे कुछ भी हो, मैं हमेशा एक ग्रैंड स्लैम चैम्पियन रहूंगा, और कोई भी मुझसे यह छीन नहीं सकता। शायद इससे मुझे थोड़ी आजादी मिलती है। शायद जब मैं फाइनल खेलूंगा तो मेरा मन थोड़ा शांत रहेगा। यानी यदि मैं हार भी जाऊं, तब भी मैं ग्रैंड स्लैम चैम्पियन ही रहूंगा।’

सच पूछें तो रविवार की यह बड़ी जीत ज्वेरेव के लिए पेशेवर करिअर की सबसे बड़ी कामयाबी और एक लंबे इंतजार के खत्म होने जैसा है। पुरुषों के सिंगल्स मेन ड्रॉ में अपना पहला मेजर टाइटल जीतने के लिए सिर्फ गोरान इवानिसेविच को उनसे ज्यादा समय (48 प्रयास) लगा था। वहीं पेरिस में नोवाक जोकोविच को अपना पहला टाइटल जीतने के लिए 12 बार खेलना पड़ा था, जो ज्वेरेव (11 बार) से ज्यादा है।

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‘मैंने अपने टेनिस करिअर के कुछ सबसे मुश्किल पल इसी कोर्ट पर बिताए हैं’

ज्वेरेव ने अपनी भावनाओं की जटिलता को समझाते हुए कहा, ‘जब मैं ज़मीन पर लेटा था तो सारी भावनाएं बाहर आ गईं क्योंकि मुझे लगता है कि यह कोर्ट मेरे लिए बहुत-बहुत खास है। यह बहुत सकारात्मक तरीके से खास है, लेकिन नकारात्मक तरीके से भी खास है क्योंकि मैंने अपने टेनिस करिअर के कुछ सबसे मुश्किल पल यहीं बिताए हैं। मैं इस कोर्ट पर चोट के साथ लेटा हुआ था और मुझे नहीं पता था कि मैं कभी वापसी कर पाऊंगा या नहीं। मैंने यहां एक ग्रैंड स्लैम फाइनल भी गंवाया था। मेरे लिए वे सभी यादें मिट नहीं गई हैं। वे अब भी मेरे साथ हैं, लेकिन यह जीत उन सभी पर भारी पड़ेगी।’

उपजेता फ्लेवियो कोबोली बोले – यह तो सिर्फ शुरुआत है

वहीं अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में कड़ी चुनौती प्रस्तुत करने के बावजूद उपजेता रहे 24 वर्षीय इतालवी फ्लेवियो कोबोली ने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है और उन्हें अभी काफी लंबा सफर तय करना है। नि:संदेह अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में हारना दुखद होता है, लेकिन कोबोली ने अपने समर्थकों से गुजारिश की कि वे रविवार को एलेक्जेंडर ज्वेरेव से पांच सेटों में मिली हार के दुख में शामिल होने के बजाय, उनकी जिंदगी के इन सबसे शानदार दो हफ्तों का जश्न मनाएं और मुस्कुराएं।

‘कोर्ट पर बिताए हर पल का आनंद मुस्कुराते हुए लेना चाहता हूं’

कोबोली ने कहा, ‘मैंने कम उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था और कभी ऐसे नतीजों की उम्मीद नहीं की थी, लेकिन अब जब मैं यहां हूं तो मैं कुछ खास करना चाहता हूं क्योंकि मेरे लिए यह सब खत्म नहीं हुआ है। यह तो सिर्फ शुरुआत है और मैं अभी युवा हूं। मैं बस कोर्ट पर बिताए हर पल का आनंद मुस्कुराते हुए लेना चाहता हूं।’

‘साशा 10 वर्षों से यहां खेल रहे, वह जीत के असली हकदार थे’

पिछले वर्ष पहली बार किसी मेजर (विम्बलडन) के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे कोबोली ने ज्वेरेव के बारे में कहा, ‘आखिरकार वह जीते, इसलिए जीत के असली हकदार वही हैं। लेकिन मैंने यह भी कहा कि वह इसके हकदार हैं क्योंकि साशा (ज्वेरेव का लोकप्रिय नाम) 10 वर्षों से यहां खेल रहे हैं और उन्होंने कई शानदार नतीजे हासिल किए हैं। मुझे लगता है कि अपने करिअर में उन्होंने जो कुछ भी किया है, उसके लिए वह एक ग्रैंड स्लैम जीतने के हकदार हैं।’

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