पश्चिम बंगाल : ममता बनर्जी की TMC में मची भगदड़, काकोली घोष के बाद राष्ट्रीय प्रवक्ता शांतनु सेन का भी इस्तीफा
कोलकाता, 28 मई। सत्ता छिनने के बाद राजनीतिक पार्टियों में किस प्रकार असंतोष उभरता है और नेता कैसे रंग बदलते हैं, इसका ताजा उदाहण पश्चिम बंगाल में दिखाई पड़ रहा है। दरअसल, 15 वर्षों तक लगातार सत्तारूढ़ ममता बनर्जी की अगुआई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों बड़ी पराजय के बाद ही राष्ट्रीय स्तर से लेकर कस्बाई नेता तक टीएमसी का साथ छोड़ने को आतुर हैं।
इसी क्रम में पूर्व राज्यसभा सदस्य और टीएमसी नेता शांतनु सेन ने भी गुरुवार को आरजी कर बलात्कार/हत्या मामले तथा संस्थान से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पार्टी की कड़ी आलोचना करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले टीएमसी के एक और प्रवक्ता अरुप चक्रवर्ती ने भी पद से इस्तीफा दे दिया था।

एक दिन पहले ही टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी पार्टी की महिला शाखा के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे पत्र में उन्होंने कहा था कि पार्टी उन्हें एक साथी सांसद के दुर्व्यवहार से बचाने में विफल रही, जिसका उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से बनर्जी की ओर इशारा करते हुए जिक्र किया था।
शांतनु ने ममता को पत्र भेजकर दिया इस्तीफा
शांतनु सेन ने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक पत्र भेजकर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे दिया। दिलचस्प तो यह है कि राज्य में सरकार बदलने के तुरंत बाद शांतनु ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बधाई दी थी। इसके अलावा उन्होंने आर.जी. कर अस्पताल की घटना की जांच के संबंध में शुभेंदु के प्रशासन के साथ सहयोग का संदेश भी दिया था। संयोग से शांतनु ने इसके कुछ ही समय बाद यह फैसला लिया।
शांतनु ने ममता को प्रेषित पत्र में क्या लिखा?
ममता को प्रेषित पत्र में शांतनु ने लिखा, ‘जनता के फैसले के सामने विनम्रतापूर्वक झुकते हुए मैं तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देना चाहता हूं।’ उनके पत्र में आर.जी. कर अस्पताल की घटना का भी जिक्र है। उन्होंने लिखा, ‘मौजूदा परिस्थितियों में, जहां बंगाल की जनता ने आर.जी. कर प्रकरण, अभया घटना और नौकरियों की बिक्री सहित विभिन्न अनैतिक कृत्यों और भ्रष्टाचार की घटनाओं के कारण हमें नकार दिया है, मेरा अंतर्मन अब मुझे एक प्रवक्ता के तौर पर इन मामलों का बचाव या समर्थन करने की अनुमति नहीं देता।’
KMC के दो पार्षदों ने अहम निकाय पदों से दिया त्यागपत्र
इससे पहले कोलकाता नगर निगम (KMC) के पार्षदों सुशांत घोष और अरुप चक्रवर्ती ने बुधवार को अहम निकाय पदों से इस्तीफा दे दिया और इस अवसर का उपयोग पार्टी नेतृत्व और हार के बाद स्थिति से निबटने के उसके तरीके पर असामान्य रूप से मुखर हमला करने के लिए किया। घोष ने बरो-12 के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि चक्रवर्ती ने नगर निकाय की लेखा समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। हालांकि दोनों ने पार्षद के अपने पद बरकरार रखे। उनकी टिप्पणियों में इस्तीफे से भी अधिक तीखापन था।
टीएमसी पर लगाए ये आरोप
अरुप चक्रवर्ती ने पत्रकारों से कहा, ‘हार स्वीकार करनी ही होगी। यदि हम हार स्वीकार नहीं करते तो पिछली जीतें भी अर्थहीन हो जाती हैं। इसे कई लोग पार्टी नेतृत्व के उन वर्गों के लिए एक अप्रत्यक्ष खंडन के रूप में देखते हैं, जिन्होंने चुनावी हार के पैमाने और विमर्श पर सवाल उठाए थे।’
दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद वरिष्ठ मंत्री और प्रभावशाली नेता पहुंच से बाहर हो गए हैं। चक्रवर्ती ने कहा, ‘कई वर्षों तक हम मुख्यमंत्री तक पहुंच भी नहीं पाए क्योंकि उनके इर्द-गिर्द कुछ लोग हमेशा रहते थे थे। हार के बाद, उनमें से कई नेता सड़कों से गायब हो गए।’
राजनीतिक रूप से संवेदनशील एक टिप्पणी में उन्होंने विस्थापित समर्थकों को घर लौटने में मदद करने के लिए बीजेपी सरकार को धन्यवाद भी दिया। यह एक ऐसा बयान था, जिसने भविष्य में संभावित राजनीतिक पुनर्गठन को लेकर अटकलों को जन्म दिया।
पार्षद देबोलीना बिस्वास भी दे चुकी हैं इस्तीफा
कुछ ही दिन पहले पार्षद देबोलीना बिस्वास ने केएमसी के बोरो-9 के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि भवानीपुर में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर असंतोष था। भवानीपुर को कभी तृणमूल के सबसे सुरक्षित गढ़ों में से एक माना जाता था। ये घटनाक्रम इस महीने की शुरुआत में राज्य में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल के भीतर बढ़ते आंतरिक असंतोष के बीच सामने आए हैं।
कई नेता, विधायक और पार्षद सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के प्रति असंतोष व्यक्त कर रहे
इस बीच वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार सहित कई नेताओं, विधायकों और पार्षदों ने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के प्रति असंतोष व्यक्त किया है। कुछ ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई पार्टी बैठकों में भाग नहीं लिया जबकि अन्य ने संगठन के कामकाज पर खुले तौर पर सवाल उठाए हैं।
अब तक कम से कम 60 तृणमूल पार्षद दे चुके हैं अपने पदों से इस्तीफा
पार्टी और नगर निकाय सूत्रों के अनुसार राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से नगरपालिकाओं में कम से कम 60 तृणमूल पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है या संगठनात्मक जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है। पश्चिम बंगाल के 128 नगर निकायों में से 125 पर अब भी नियंत्रण रखने वाली पार्टी के लिए ये घटनाक्रम एक विचित्र स्थिति को दर्शाते हैं।
