शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दी जानकारी- पहली कक्षा से आठवीं तक की पुस्तकें 22 भाषाओं में की जा रहीं तैयार

नई दिल्ली, 1 सितम्बर। देश में कक्षा एक से कक्षा आठ तक की स्कूली किताबें 22 अलग-अलग भाषाओं में तैयार की जा रही हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के प्रयासों की सराहना की।

बच्चों को उनकी अपनी भाषा में सीखने का अवसर मिलेगा

प्रह्लाद जोशी ने यहां एनसीईआरटी के 66वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पहली कक्षा से आठवीं तक की पाठ्यपुस्तकें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा अलग-अलग भारतीय भाषाओं में 121 प्रारंभिक भाषा सामग्री भी तैयार की जा रही हैं, जिनमें 93 जनजातीय भाषाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों को उनकी अपनी भाषा में सीखने का अवसर मिलेगा और शिक्षा को देश के अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्कूली शिक्षा में व्यापक सुधारों के लिए मजबूत आधार

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने स्कूली शिक्षा में व्यापक सुधारों के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। इसमें बच्चों के केवल किताबी ज्ञान पर जोर देने के बजाय उनके समग्र विकास, रचनात्मकता, तार्किक सोच, अनुभव आधारित शिक्षा और दक्षता आधारित सीखने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी देश की स्कूली शिक्षा को बदलने और बच्चों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने एनसीईआरटी से शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक नवाचार, समावेशिता, शोध और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलाव लाने का आह्वान किया।

6 दशकों से भारतीय शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा रही है NCERT

शिक्षा मंत्री ने कहा कि एनसीईआरटी छह दशकों से अधिक समय से भारतीय शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा रही है। इसकी पाठ्यपुस्तकों, अध्ययन सामग्री और पाठ्यक्रम ढांचे ने देश में स्कूली शिक्षा को दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी द्वारा तैयार की गई नई किताबों का उद्देश्य बच्चों के लिए पढ़ाई को अधिक रोचक, उपयोगी और उनके जीवन से जुड़ा बनाना है। साथ ही इनमें भारत की विरासत और ज्ञान परंपरा को भी उचित स्थान दिया जा रहा है।

शिक्षा एवं समाज में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही

उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और शिक्षा तथा समाज में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एनसीईआरटी को अपने शोध तंत्र को और मजबूत करने के साथ-साथ तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक विषयों का ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें डिजिटल साक्षरता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की समझ, तार्किक सोच, समस्या समाधान और नवाचार जैसे कौशलों से भी लैस करना जरूरी है।

विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा

जोशी ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में उचित बदलाव, मनो-सामाजिक सहायता और शिक्षकों के प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों के मानसिक कल्याण पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने कई नई सुविधाओं का उद्घाटन भी किया

समारोह के दौरान शिक्षा मंत्री ने एनसीईआरटी में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें रोबोटिक्स लर्निंग सेंटर, अनुवाद प्रयोगशाला और उन्नत टेलीविजन स्टूडियो शामिल हैं। इन सुविधाओं के जरिए तकनीक आधारित शिक्षा, भारतीय भाषाओं में शैक्षिक सामग्री और नए डिजिटल शैक्षिक कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी।

एनसीईआरटी को शिक्षा की बदलती जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ना होगा

जोशी ने कहा कि एनसीईआरटी को अपने छह दशकों से अधिक के अनुभव और उपलब्धियों को आधार बनाते हुए शिक्षा की बदलती जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ना होगा। उन्होंने एनसीईआरटी को अधिक नवाचारी, समावेशी, शोध आधारित और भविष्य के लिए तैयार संस्थान बनाने पर जोर दिया। समारोह में भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष डॉ. चामू कृष्ण शास्त्री, एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी तथा शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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