नई दिल्ली, 1 सितम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क, विकास तथा आपसी सहयोग को लेकर भारत का दृष्टिकोण सामने रखा। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि बिश्केक घोषणापत्र के अलावा चार समझौता ज्ञापनों और 20 से अधिक फैसलों और बयानों को भी अपनाया गया।
सिबी जॉर्ज ने बताया कि इनमें जलवायु परिवर्तन, परमाणु सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और नशीले पदार्थों की लत से मुकाबला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। भारत ने कई महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया और उनका समर्थन किया, जिन्हें बिश्केक घोषणा-पत्र में स्थान मिला। इनमें एससीओ चार्टर में अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करना, सभ्यता संवाद मंच, युवा वैज्ञानिक मंच और युवा लेखक सम्मेलन जैसी पहलें शामिल हैं।
PM @narendramodi at the 26th SCO Summit.
Secretary (West) @AmbSibiGeorge shares details on India’s participation.
Tune-in ⬇️ pic.twitter.com/WQmYTQVaXi
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 1, 2026
समिट के बाद सिबी जॉर्ज ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में 31 अगस्त से एक सितम्बर के बीच आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) राष्ट्राध्यक्ष परिषद की 26वीं बैठक में भाग लिया। इस साल एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है। इस मौके पर नेताओं ने अब तक हुई प्रगति का जायजा लिया और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में एससीओ की भूमिका को और मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।’
जॉर्ज ने पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव को गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद देते हुए की। उन्होंने कहा कि एससीओ की 25वीं वर्षगांठ अगले 25 वर्षों की दिशा तय करने का उपयुक्त अवसर है। उन्होंने कहा कि संगठन ने पिछले ढाई दशकों में संवाद और सहयोग की मजबूत परंपरा विकसित की है और अब इसे ठोस परिणामों में बदलने की जरूरत है।
PM @narendramodi participated in the 26th SCO Summit in Bishkek.
In his address, PM reiterated India’s position that dialogue and diplomacy are the only way forward to resolve conflicts. He stressed the need for zero tolerance towards terrorism and also emphasized that there… pic.twitter.com/K8QCQ7Yo7M
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 1, 2026
प्रधानमंत्री ने पिछले एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत द्वारा रखे गए ‘सुरक्षा, संपर्क और अवसर’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इन तीनों क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने संघर्षों के समाधान को लेकर भारत का स्पष्ट रुख दोहराते हुए कहा कि युद्ध के मैदान में संघर्षों का समाधान नहीं हो सकता और संवाद एवं कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।
पीएम मोदी ने आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। पीएम मोदी ने यूरेशिया क्षेत्र की सुरक्षा और अफगानिस्तान में शांति एवं स्थिरता के बीच गहरे संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की स्थिरता पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में उन्होंने अफगानिस्तान के प्रति भारत की विकासात्मक और मानवीय सहायता का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने एससीओ देशों की साझा प्रगति और समृद्धि के लिए मजबूत और विश्वसनीय संपर्क पहलों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे संपर्क प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ें, व्यापार बढ़ाएं और विकास के नए अवसर पैदा करें। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे सभी संपर्क प्रयासों में देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने तकनीक, उद्यमिता, नवाचार, स्टार्टअप और लोगों के बीच संपर्क को एससीओ देशों के नागरिकों के लिए नए अवसर पैदा करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने किर्गिस्तान की अध्यक्षता में युवाओं की भागीदारी पर दिए गए जोर की सराहना की।
पीएम मोदी घोषणा की कि भारत इस वर्ष के अंत में पहले एससीओ सभ्यता संवाद मंच (एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम) की मेजबानी करने के लिए उत्सुक है। यह भारत की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य एससीओ सदस्य देशों के बीच सभ्यतागत आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने इसी क्रम में सफलतापूर्वक शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए राष्ट्रपति सदिर जापारोव को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भारत साझा प्रगति और समृद्धि के लिए एससीओ परिवार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।


