अयोध्या राम मंदिर में स्वर्ण जड़ित रामचरितमानस पर विवाद, पूर्व गृह सचिव बोले- दान की रसीद तक नहीं मिली
नई दिल्ली, 5 जुलाई। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब 147 किलोग्राम वजनी स्वर्ण जड़ित रामचरितमानस को लेकर नया विवाद सामने आया है। राम मंदिर ट्रस्ट को यह अनमोल ग्रंथ दान करने वाले पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण ने दावा किया है कि दान देने के बाद उन्हें आज तक इसकी कोई रसीद या आधिकारिक पावती नहीं मिली। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें यह तक नहीं पता कि यह रामचरितमानस फिलहाल कहां है।
‘मां और पत्नी के गहने गलाकर तैयार करवाई थी रामचरितमानस’
एक समाचार चैनल से बातचीत में एस. लक्ष्मीनारायण ने बताया कि 8 अप्रैल 2024 को उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट को सोने के पन्नों वाली रामचरितमानस भेंट की थी। उनके मुताबिक, इस ग्रंथ को तैयार कराने के लिए उन्होंने अपनी मां और पत्नी के गहनों का सोना इस्तेमाल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि दान देने के बावजूद उन्हें न तो कोई रसीद दी गई और न ही दान स्वीकार किए जाने की कोई आधिकारिक पावती मिली।
‘एक साल बाद भी नहीं मिला जवाब’
लक्ष्मीनारायण ने कहा कि उन्होंने इस मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात की थी। उन्हें समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तत्कालीन सलाहकार अवनीश अवस्थी से अपनी चिंता साझा की तो उन्हें जवाब मिला कि “दान दिया है तो उसे दान ही समझिए।”
चंपत राय पर भी उठाए सवाल
पूर्व गृह सचिव ने दावा किया कि जब उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से इस विषय पर बात की तो उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि “मंदिर में वही होगा, जो मैं चाहूंगा।” लक्ष्मीनारायण ने कहा कि मंदिर किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसका निर्माण 500 वर्षों के संघर्ष के बाद संभव हो सका है।
पहले प्रदर्शित हुई, फिर अचानक हटा दी गई
लक्ष्मीनारायण के अनुसार, दान के बाद कुछ समय तक स्वर्ण जड़ित रामचरितमानस मंदिर परिसर में प्रदर्शित की गई थी, जहां श्रद्धालु इसके दर्शन करते थे और नियमित पूजा भी होती थी। बाद में इसे अचानक हटा दिया गया। उनका कहना है कि अब इसकी वर्तमान स्थिति की कोई जानकारी नहीं है, जिससे उन्हें चिंता हो रही है।
क्या है इस स्वर्ण जड़ित रामचरितमानस की खासियत?
दान की गई यह विशेष रामचरितमानस कई मायनों में अनूठी बताई जाती है।
- कुल वजन लगभग 147 किलोग्राम
- 522 पन्नों पर सोने की परत चढ़ी हुई
- सोना, चांदी और तांबे से निर्मित
- गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के सभी 10,902 श्लोक अंकित
- अप्रैल 2024 में राम मंदिर ट्रस्ट को भेंट की गई
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में दान की गई स्वर्ण जड़ित रामचरितमानस की वर्तमान स्थिति और दान प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर सभी की नजर बनी हुई है। यदि ट्रस्ट इस मामले में कोई स्पष्टीकरण जारी करता है, तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
