महिला आरक्षण पर कांग्रेस का प्रत्याक्रमण : 26 शहरों में महिला नेताओं ने जनता के सामने रखा सरकार का मकसद
नई दिल्ली, 21 अप्रैल। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल को लेकर अपना देशव्यापी अभियान और तेज कर दिया है। मंगलवार को कांग्रेस की महिला नेताओं ने देश के 26 प्रमुख शहरों में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कीं। इन प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने संसद के हाल ही में समाप्त हुए विशेष सत्र के असली मकसद को जनता के सामने रखा।
महिला आरक्षण के नाम पर देश को गुमराह कर रही मोदी सरकार
कांग्रेस की महिला नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर देश को गुमराह कर रही है। उनका कहना है कि सरकार का असली उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि परिसीमन (Delimitation) के जरिए सत्ता पर काबिज रहना है। नेताओं ने दावा किया कि महिला आरक्षण बिल की आड़ में सरकार परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है, जिससे लोकसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में सीटों का बड़ा पुनर्गठन हो सकता है।
26 press conferences were held in 26 cities across the country by @INCIndia women leaders exposing the real purpose of the just-concluded special session of Parliament – which was Modi preservation through delimitation, not women’s reservation pic.twitter.com/0AO7oTdH2s
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 21, 2026
कांग्रेस के अनुसार, यह कदम महिलाओं के असली सशक्तिकरण के बजाय सत्तारूढ़ दल की राजनीतिक चाल है। पार्टी की महिला नेताओं ने कहा कि इस देशव्यापी अभियान के जरिए कांग्रेस मोदी सरकार की मंशा को बेनकाब कर रही है और अन्य विपक्षी दलों को भी इस मुद्दे पर एकजुट करने का प्रयास कर रही है।
आरक्षण के खिलाफ नहीं कांग्रेस
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की सचिव अंजलि निम्बालकर ने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं को तत्काल आरक्षण देने के बजाय परिसीमन अभ्यास पर जोर देकर 2029 के चुनावों के लिए महिला आरक्षण संशोधन कानून को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
निम्बालकर ने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन भाजपा की मदद से संसद में सीटें बढ़ाने के मकसद से परिसीमन के पक्ष में भी नहीं है। मोदी सरकार को 2023 के महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू करना चाहिए। अगर सरकार इसे आगामी मानसून सत्र में लागू करती है तो विपक्ष इसका पूरा समर्थन करेगा। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से जातिगत जनगणना कराने और उसके आधार पर आरक्षण लागू करने की भी मांग की।
राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन का तीखा हमला
कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा पर महिलाओं के आरक्षण मुद्दे पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक लगातार झूठ बोल रहे हैं। रंजीत रंजन ने कहा कि भाजपा यह भ्रम फैला रही है कि कांग्रेस और विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन नहीं किया, इसलिए यह पारित नहीं हो सका। जबकि हकीकत यह है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (128वां संविधान संशोधन) सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। यह कानून बन चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक लाई, वह महिला आरक्षण का नहीं बल्कि परिसीमन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक था। इसमें लोकसभा की सीटों को 850, राज्यों की सीटों को 815 और केंद्र शासित प्रदेशों की सीटों को 35 करने का प्रस्ताव था।
रंजीत रंजन ने सवाल किया कि जब 2026-27 में नई जनगणना शुरू हो रही है और सरकार जातिगत जनगणना की भी बात कर चुकी है तो फिर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन क्यों किया जा रहा है? अगर सरकार वाकई महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है तो परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं लागू कर देती? कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2034 से लागू होने वाला था, लेकिन संशोधन के जरिए इसे तुरंत लागू किया जा सकता था। कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि भाजपा की मंशा महिला आरक्षण की नहीं, बल्कि अपने मनमाफिक परिसीमन की थी, जो विपक्ष की एकजुटता के कारण सफल नहीं हो सकी।
भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर
इधर, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने भी भाजपा द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को भ्रामक बताया। गहलोत ने कहा कि हाल में संसद में लाया गया विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि मनमर्जी के मुताबिक परिसीमन करने के लिए था। भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। गहलोत ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक तो सितंबर 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और कानून बन चुका है। तीन साल बीत जाने के बावजूद सरकार ने इसका नोटिफिकेशन नहीं जारी किया। अब जब नोटिफिकेशन जारी किया गया है तो उसमें भी परिसीमन को जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है तो इसे तुरंत लागू कर दे। कांग्रेस इस मुद्दे पर पूरी तरह तैयार है। कांग्रेस का यह देशव्यापी अभियान विपक्षी दलों को एकजुट करने और मोदी सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास माना जा रहा है। पार्टी महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने और परिसीमन से अलग रखने की मांग पर अड़ी हुई है।
