नई दिल्ली, आठ अक्टूबर। देश के दूरदराज ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने के लिए मोदी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। इस क्रम में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को यहां इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC 2026) में घोषणा की कि सरकार देश के लगभग 35,000 गांवों में टेलीकॉम टावर लगाने के लिए ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ के बीच खर्च कर रही है।
सुदूर क्षेत्रों में टेलीकॉम टावर लगाने के लिए खर्च होंगे 12-15 हजार करोड़
संचार मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन इलाकों में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर व्यापारिक दृष्टिकोण से फायदे का सौदा नहीं है, वहां सरकार को खुद आगे आकर निवेश करना पड़ रहा है ताकि कोई भी क्षेत्र कनेक्टिविटी से अछूता न रहे।
जहां फायदा नहीं, वहां सरकार खुद करेगी निवेश
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और इंटर-ऑपरेबिलिटी पर जोर देते हुए कहा, ‘हर क्षेत्र रिटर्न या मुनाफा देने वाला नहीं हो सकता। कई दूरदराज के इलाकों में पहुंच एक बड़ी चुनौती है, जहां निजी कंपनियां मुनाफा न होने के कारण नेटवर्क नहीं लगा पातीं। ऐसे क्षेत्रों में सरकार का आगे आना अनिवार्य है और हमने यही काम किया है।’
After a long and eventful day at #IMC2026, this is one event I was looking forward to…
At the IMC Awards and 5G Innovation Hackathon Awards, we celebrated the brilliance of our innovators whose bold ideas and out-of-the-box thinking are shaping India’s digital future. https://t.co/W76H1EVGIp
— Jyotiraditya M. Scindia (@JM_Scindia) October 8, 2026
ग्राहकों को ध्यान में रखकर स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग
संचार मंत्री ने कहा कि सरकार स्पेक्ट्रम के बेहतर और सही इस्तेमाल के लिए ‘स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग’ पर काम कर रही है। इससे मौजूदा स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
हाईवे की तरह बनेगा टेलीकॉम नेटवर्क
सिंधिया ने नेविगेशन और नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए ‘मिडिल माइल’ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर बल दिया। उन्होंने सरकार की भूमिका की तुलना हाईवे निर्माण से करते हुए कहा, “जैसे सरकार का काम हाईवे बनाना है, वैसे ही टेलीकॉम में हमारा काम ‘मिडिल माइल’ तैयार करना है। इसके बाद हमारा अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि लोग इस नेटवर्क हाईवे का सही और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें।”
संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के 1.40 लाख करोड़ का बजट तय
संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत सरकार ने 1.40 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसका मकसद केवल ग्राम पंचायतों तक ही नहीं, बल्कि सीधे गांवों और घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन पहुंचाना है।
भारतनेट और 4G सैचुरेशन स्कीम का विस्तार
इससे पहले सरकार ने ‘4G सैचुरेशन स्कीम’ के तहत करीब 30,000 गांवों की पहचान की गई थी, जहां 21,000 टेलीकॉम टावर लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 17,000 टावर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।
AI विस्तार के कुछ नकारात्मक परिणाम भी आएंगे, सुरक्षा के नियम बनाने की जरूरत
इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और AI के प्रभाव पर बात करते हुए सिंधिया ने 2000 के दशक से पहले के आईटी दौर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी अपने आप में एक जरिया है, लेकिन आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं, उसी से आपकी उत्पादकता तय होती है।
उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि AI के विस्तार से कुछ नकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। इसके लिए एक ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ की जरूरत है ताकि लोगों को टेक्नोलॉजी के गलत प्रभावों से बचाया और सुरक्षित रखा जा सके।
देश में 4G और 5G की मौजूदा स्थिति
IMC 2026 में डेटा साझा करते हुए सिंधिया ने बताया कि भारत के 99% से अधिक गांवों में अब 4G कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है। वहीं देश के 99.9% जिलों को 5G नेटवर्क से कवर कर लिया गया है। अब भारत का मुख्य फोकस केवल बुनियादी नेटवर्क देने तक सीमित नहीं है, बल्कि 5G, 6G और AI-सक्षम सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।


