नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। एशियाई पैरा खेलों के तिहरे स्वर्ण पदक विजेता शीर्ष पैरा एथलीट नीरज यादव ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। बताया जा रहा है कि डोपिंग के आरोपों में निलंबन की वजह से बीते आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों में भाग नहीं ले पाने और एक महिला के साथ उनकी दोस्ती टूटने के बाद वह भावनात्मक तनाव में थे।
मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास अपनी कार के बगल में सड़क पर पड़े मिले थे नीरज
गाजियाबाद निवासी 42 वर्षीय नीरज 27 अक्टूबर की रात दिल्ली के मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास अपनी कार के बगल में सड़क पर पड़े मिले थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जाफराबाद पुलिस इस मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 194 के तहत निजी रिश्तों समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार 27/28 अक्टूबर की रात करीब 12:08 बजे जाफराबाद पुलिस स्टेशन को जीटीबी अस्पताल से सूचना मिली कि एक व्यक्ति को इमरजेंसी में लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद एसआई विशाल त्यागी पुलिसकर्मियों के साथ अस्पताल पहुंचे। उस समय शव को अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया था। बुधवार को उनका शव पोस्टमार्टम के लिए जीटीबी अस्पताल ले जाया गया।
नीरज की महिला मित्र ही उन्हें 27 की रात अस्पताल ले गई थी
पुलिस की प्रारंभिक जांच पड़ताल के दौरान नीरज को अस्पताल ले जाने वाली महिला ने बताया कि दिसम्बर, 2025 से उसकी नीरज के साथ दोस्ती थी। 27 अक्टूबर को वह हरियाणा के सोनीपत में नीरज से मिलने गई थी। महिला के अनुसार उसने नीरज से कहा कि वह आगे उनसे संपर्क में नहीं रह सकती।
इसके बाद नीरज अपनी स्कॉर्पियो-एन कार से उसे दिल्ली के मौजपुर छोड़ने गए। रात करीब नौ बजे महिला को संदेह हुआ और वह मौजपुर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास पहुंची। वहां उसने नीरज को कार के बगल में सड़क पर पड़ा देखा। इसके बाद वह उन्हें अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

नीरज ने जकार्ता व हांगझू एशियाई पैरा खेलों में कुल 3 स्वर्ण जीते थे
नीरज ने एशियाई पैरा खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीते थे। उन्होंने 2018 में जकार्ता में भाला फेंक में खिताब तथा 2023 में हांगझू में भाला फेंक व चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीते थे। हालांकि हांगझू खेलों के बाद डोपिंग मामला सामने आने के बाद 2023 में जीते गए उनके दोनों स्वर्ण पदक छीन लिए गए थे। इसी क्रम में चार वर्षों का निलंबन झेलने के कारण उन्हें सरकार से मिलने वाली पुरस्कार राशि और सरकारी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा था।
डोपिंग में 4 वर्षों के प्रतिबंध के चलते हांगझू के दोनों स्वर्ण छीन लिए गए थे
नीरज फिलहाल सोनीपत में अंशनीर स्पोर्ट्स अकादमी के नाम से एक ऑनलाइन खेल अकादमी चला रहे थे। वह विवाहित थे और उनके परिवार में उनकी पत्नी और तीन साल की बेटी हैं। नीरज को सात साल की उम्र में पोलियो हो गया था। उन्होंने पहले ह्वीलचेयर टेनिस खेलना शुरू किया, फिर पैरा एथलेटिक्स में हाथ आजमाए और अंततःअंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। एफ55 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले यादव प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन के लिए दोषी पाए जाने के बाद झेल रहे थे।
पैरा-एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच सत्यनारायण ने जताया शोक
इस बीच भारतीय पैरा-एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस सत्यनारायण ने कहा कि 2023 के हांगझू एशियाई पैरा खेलों के बाद डोपिंग मामला सामने आने के बाद से वह नीरज यादव के संपर्क में थे। सत्यनारायण ने कहा, ‘नीरज ने आत्महत्या कर ली है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरे उनसे घनिष्ठ संबंध थे। डोपिंग मामले में उनका नाम आने के बाद से मैं लगातार उनके संपर्क में था।’
डोपिंग मामले के बाद काफी तनाव में रहते थे नीरज
सत्यनारायण ने कहा, ‘डोपिंग मामले के बाद वह काफी तनाव में थे। उन्हें चार वर्षों के लिए निलंबित किया गया था। कुछ महीने पहले उन्होंने मुझसे पूछा था कि क्या वह आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों के चयन ट्रायल्स में भाग ले सकते हैं। मैंने उनसे कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि उनके निलंबन की अवधि अब तक पूरी नहीं हुई है।’
कोच ने कहा कि डोपिंग मामले ने यादव के करियर को करारा झटका लगा और इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो गई। उन्होंने कहा, ‘जब उन्होंने हांगझू एशियाई पैरा खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते तो उन्हें उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी मिलने वाली थी, जिससे उनका जीवन बेहतर हो सकता था। उन्हें तीन करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि भी मिलने वाली थी। उनके सभी साथियों को नौकरी मिल चुकी है।’
सत्यनारायण ने बताया कि निलंबन की प्रक्रिया राष्ट्रीय डोपिंगरोधी एजेंसी (नाडा) से शुरू हुई। इसके बाद रिपोर्ट को विश्व डोपिंगरोधी एजेंसी (वाडा) को भेजा गया और फिर एशियाई पैरालंपिक समिति ने उनके पदक छीन लिए।
स्वर्ण छीने जाने, पुरस्कार राशि और नौकरी नहीं मिलने से अवसाद में थे
सत्यनारायण ने नीरज की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उनके आत्महत्या करने के सटीक कारणों की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं सटीक कारण नहीं बता सकता, लेकिन वह कई कारणों से अवसाद में थे। वह दो स्वर्ण पदक खोने से सदमे में थे। पुरस्कार राशि और नौकरी नहीं मिलना दो अन्य कारण थे।’
सत्यनारायण ने यह भी कहा, ‘उन्होंने निश्चित रूप से जहर खाया है, लेकिन उन्होंने कौन सा पदार्थ लिया है, यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा। लेकिन यह पक्का है कि उन्होंने जहर खाया। उनके शरीर का रंग भी कुछ बदल गया है।’


