BWF विश्व बैडमिंटन : एलेक्स लैनियर नए पुरुष एकल चैम्पियन, एन से यंग ने दूसरी बार जीती महिला उपाधि

नई दिल्ली, 23 अगस्त। फ्रांसीसी एलेक्स लैनियर ने रविवार को यहां इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में संपन्न BWF विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप के नए पुरुष एकल चैम्पियन का श्रेय अर्जित किया जबकि मौजूदा विश्व नंबर एक दक्षिण कोरियाई एन से यंग ने दूसरी बार महिला एकल उपाधि जीती।

फाइनल के पहले ही प्रवेश में फ्रांसीसी लैनियर ने मारी बाजी

विश्व रैंकिंग में दसवें स्थान पर काबिज और यहां नौवीं सीड लेकर उतरे लैनियर 50 मिनट में निर्णीत एकतरफा पुरुष एकल फाइनल में 10वें वरीय जापानी कोडाई नाराओका को 21-11, 21-11 से शिकस्त दी। दिलचस्प तो यह है कि पिछले वर्ष के यूरोपीय चैम्पियन लैनियर ने कनाडाई विक्टर लाई को हराकर पहली ही बार फाइनल में भी जगह बनाई थी।

कोरियाई एन से यंग ने यामागुची से छीनी महिला एकल उपाधि

उधर महिला एकल फाइनल भी सिर्फ 49 मिनट में फरिया गया, जब मौजूदा ओलम्पिक चैम्पियन एन से यंग ने दूसरी सीड जापनी अकाने यामागुची को 21-17, 21-14 से हरा दिया। एन ने 2023 कोपेनहेगन में अपना पहला पहला विश्व खिताब जीता था जबकि 2025 पेरिस में उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था।

दिलचस्प तो यह है कि मौजूदा सत्र की नौ स्पर्धाओं में सात खिताब जीतकर यहां आईं 24 वर्षीय एन ने पूरे हफ्ते एक भी गेम गंवाए बिना खिताब पर नाम लिखाया। वह दूसरी बार महिला एकल उपाधि जीतने वाली पहली कोरियाई खिलाड़ी हैं। वहीं तीन बार की विश्व विजेता व मौजूदा विश्व नंबर दो यामागुची पेरिस में जीती गई पिछली विश्व उपाधि की रक्षा नहीं कर सकीं।

फ्रांस के नाम ऐतिहासिक डबल

सच पूछें तो फ्रांस ने प्रतियोगिता के 30वें संस्करण में ऐतिहासिक डबल पर अपना नाम लिखाया। दरअसल, पिछले संस्करण के कांस्य पदक विजेता थॉम गिक्वेल व डेल्फिन डेलरू की मिश्रित युगल जोड़ी ने दिन के पहले ही फाइनल में टॉप सीड चीनी फेंग यान झे व हुआंग डोंग पिंग को 78 मिनट तक खिंचे संघर्ष के बाद 22-20, 19-21, 21-15 से हरा दिया। यह विश्व चैम्पियनशिप के इतिहास में फ्रांस का पहला स्वर्ण पदक था। बाद में लैनियर ने पहली बार एकल उपाधि जीतकर फ्रांस के दूसरे स्वर्ण पदक विजेता बने।

गौर करने वाली बात तो यह है कि 2009 के बाद से किसी युगल स्पर्धा में यूरोप का यह पहला स्वर्ण पदक है। और तो और 2009 में भी यह जीत भारत में ही मिली थी, जब डेनमार्क के थॉमस लेबॉर्न और कैमिला रिटर-जुहल ने खिताब जीता था।

कोरियाई शटलरों ने भी जीते दो खिताब

फ्रांस की भांति कोरियाई शटलरों ने भी प्रतियोगिता में दो खिताब जीते। इस क्रम में महिला एकल में एन से यंग की खिताबी सफलतता से पूर्व तीसरी वरीय बेक हा ना और ली सो ही ने चीनी टॉप सीड लियू शेंग शू व टैन निंग को 51 मिनट में 21-15, 21-15 से हराकर महिला युगल खिताब का 31 वर्षों का कोरियाई इंतजार खत्म किया। कोरिया ने आखिरी बार 1995 में महिला युगल खिताब जीता था।

ली सो ही सबसे उम्रदराज महिला युगल विश्व चैम्पियन

लियू शेंग शू व टैन निंग ने सेमीफाइनल में त्रीसा जॉली व गायत्री गोपीचंद की युवा भारतीय जोड़ी को तीन गेमों के संघर्ष में हराकर उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करने पर बाध्य किया था। लेकिन फाइनल में चीनी जोड़ी कोरियाई शटलरों का मुकाबला नहीं कर सकी। इस फाइनल का दिलयस्प पहलू यह रहा कि ली सो ही 32 वर्ष और 70 दिन की उम्र में सबसे उम्रदराज महिला युगल विश्व चैम्पियन बनीं।

लियांग वेई केंग व वांग चांग ने पुरुष युगल खिताब जीत कर बचाई चीन की प्रतिष्ठा

फ्रांस व कोरिया को दो-दो खिताब मिलने के बाद चीन की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई, जो वर्ष 1983 में विश्व चैम्पियनशिप में शामिल होने के बाद हर वर्ष कम से कम एक स्वर्ण जीतता रहा है। खैर, दिन के दो शुरुआती फाइनल में चीनी शटलरों को मायूसी मिलने के बाद तीसरी वरीयता प्राप्त लियांग वेई केंग व वांग चांग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष युगल उपाधि पर चीन का नाम लिखा दिया।

क्वार्टर फाइनल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी व चिराग शेट्टी की ख्यातिनाम भारतीय जोड़ी की चुनौती तोड़ने वाले लियांग वेई व वांग चांग ने पूर्व चैम्पियन व चौथी सीड मलेशियाई आरोन चिया व सोह वूई यिक को सिर्फ 35 मिनट में 21-16, 21-17 से मात दे दी। यह लियांग व वांग का पहला विश्व खिताब था।

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