ओम बिरला से मुलाकात के बाद बोले अभिषेक बनर्जी- ‘बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने के लिए 20 याचिकाएं दी गईं’
नई दिल्ली, 19 जून। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ 20 याचिकाएं सौंपीं और उनकी सदस्यता रद करने की मांग की।
बागी सांसदों की सदस्यता रद करने की स्पीकर से मांग
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद अभिषेक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इन सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में शामिल होने का दावा किया है। पार्टी छोड़ने के आधार पर इन सांसदों को सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘20 लोगों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की। बाद में हमें पता चला कि इन सांसदों ने NCPI नाम की दूसरी पार्टी में शामिल होने का दावा किया है। किसी ने इस पार्टी का नाम नहीं सुना था। यहां तक कि इन सांसदों ने भी पहले इसका नाम नहीं सुना था।’
19 June 2026 | Shri @abhishekaitc addresses the media in Delhi. pic.twitter.com/jv7IX9JQzG
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) June 19, 2026
टीएमसी सांसद ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची में यह बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि कोई सदस्य स्वेच्छया से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो वह सांसद के रूप में अयोग्य हो जाता है। उन्होंने कहा, ‘यदि कोई व्यक्ति किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतता है और दो वर्ष बाद कहता है कि वह दूसरी पार्टी में शामिल हो रहा है तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जानी चाहिए।’
अभिषेक ने कहा कि किसी दूसरी पार्टी में विलय के लिए दो-तिहाई सदस्यों का नियम पूरी पार्टी पर लागू होता है, केवल संसदीय दल पर नहीं। उन्होंने कहा, ‘इसी आधार पर मैंने तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा नेता के रूप में इन 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग 20 अयोग्यता याचिकाएं दी हैं।’
लोकसभा अध्यक्ष ने अभिषेक को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था
उल्लेखनीय है कि लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने इन 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों की मांग पर फैसला लेने से पहले बनर्जी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। इन सांसदों ने एनसीपीआई में विलय के बाद खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
अभिषेक बनर्जी ने पिछले सप्ताह भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था। उन्होंने आग्रह किया था कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा न दी जाए। उन्होंने कहा था कि संविधान और दल-बदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देते।
