E20 ईंधन से जुड़े विवाद पर बोले नितिन गडकरी- ‘पैसे देकर चलाया गया अभियान’

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने को लेकर विरोध ‘पैसे देकर चलाया गया अभियान’ था। दरअसल, गडकरी ने सरकार के केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किए जाने के एक दिन बाद उन्होंने यह टिप्पणी की है। इन संशोधनों के तहत ई100 (लगभग शुद्ध एथनॉल) तक पर चलने वाले ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ वाहनों को अनुमति दी गई है।

..अब ई20 ईंधन को लेकर नाराजगी खत्म हो गई

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, कच्चा तेल आदि) का आयात कम करके भारत बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचा सकता है। उन्होंने कहा, ‘तीन महीने पहले ई20 (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) ईंधन के खिलाफ काफी शोर मचाया गया था। अब ई20 ईंधन को लेकर नाराजगी खत्म हो गई है… यह पैसे देकर चलाया गया अभियान था।’

एथनाल से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई भी सत्यापित प्रमाण नहीं मिला

नितिन गडकरी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें ई19-20 मिश्रण वाले ईंधन पर चल रही हैं। एथनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने का कोई सत्यापित प्रमाण नहीं मिला है।

ई20 पेट्रोल (80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल) की शुरुआत की विपक्षी दलों और कुछ उपभोक्ता समूहों ने आलोचना की थी। उन्होंने पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी क्योंकि ऐसे वाहन खास तौर पर 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के लिए तैयार नहीं किए गए थे।

भारत में 2001 में प्रायोगिक परियोजना के साथ हुई थी EBP कार्यक्रम की शुरुआत

भारत में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम की शुरुआत 2001 में एक प्रायोगिक परियोजना के साथ हुई थी और 2006 में ई5 पेश किया गया। वर्ष 2013-14 तक एथनॉल मिश्रण का स्तर करीब 1.53 प्रतिशत बना रहा। इसके बाद आवश्यक उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और नियामकीय व्यवस्था तैयार करने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया।

‘मैं राजमार्गों की गुणवत्ता से समझौता नहीं करने वाला’

केंद्रीय मंत्री ने साथ ही कहा कि राजमार्गों के कुछ हिस्सों की खराब स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर मिली शिकायतों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने हाल ही में 700-800 परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा, ‘मैं राजमार्गों की गुणवत्ता से समझौता नहीं करने वाला हूं।’ उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में राजमार्गों का इस्तेमाल करने वालों को किसी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

2 माह के भीतर दिल्ली से हरिद्वार पहुंचने में लगेंगे सिर्फ 90 मिनट

गडकरी ने कहा कि अगले दो माह में राजमार्ग परियोजना शुरू होने के बाद दिल्ली से हरिद्वार पहुंचने में 90 मिनट लगेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के सड़क बुनियादी ढांचे के विस्तार से धार्मिक स्थलों तक यात्रा का समय घट रहा है, पर्यटकों की आवाजाही बढ़ रही है और रोजगार के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम परियोजना का 80-85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले यातायात में तीन गुना वृद्धि हुई है।

बुनियादी ढांचे का विकास भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़

बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश के आर्थिक प्रभाव को समझाते हुए उन्होंने कहा, ‘मुझे हमेशा लगता है कि बुनियादी ढांचे का विकास भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। दुनिया में भी यह हर जगह अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि हम बुनियादी ढांचे पर 100 रुपये खर्च करने जा रहे हैं तो अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव 325 रुपये का होता है। इससे GDP (सकल घरेलू उत्पाद) बढ़ेगी।’

राजमार्गों का कुल नेटवर्क 12 वर्षों में 6 गुना बढ़कर 1.46 लाख किमी हुआ

उन्होंने कहा कि भारत में राजमार्गों का कुल नेटवर्क 2014 के 91,287 किलोमीटर से 1.6 गुना बढ़कर 2026 में 1.46 लाख किलोमीटर हो गया। चार लेन और उससे अधिक चौड़ाई वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क 2014 के 18,278 किलोमीटर से 2.6 गुना बढ़कर 2026 में 49,160 किलोमीटर हो गया। इसी अवधि में उच्च गति वाले गलियारों का नेटवर्क 12 गुना बढ़कर 6,788 किलोमीटर हो गया।

‘बस बॉडी कोड’ के बाद मंत्रालय जल्द ही लाएगा ‘ट्रक बॉडी कोड’

गडकरी ने साथ ही कहा कि ‘बस बॉडी कोड’ को सख्त बनाने के बाद उनका मंत्रालय अब ‘ट्रक बॉडी कोड’ भी लाने जा रहा है। ‘बॉडी कोड’ से तात्पर्य वाहनों की बॉडी के डिजाइन, निर्माण और सुरक्षा से जुड़े मानकों तथा नियमों से है।

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