फ्रेंच ओपन बैडमिंटन : सिंधु सत्र में दूसरी बार सुपर 750 टूर्नामेंट के फाइनल में, आन से यंग से होगी खिताबी टक्कर

पेरिस, 24 अक्टूबर। दो बार की ओलम्पिक पदक विजेता भारत की शीर्षस्थ महिला शटलर पीवी सिंधु ने शनिवार को यहां फ्रेंच ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के जापान की हिना अकेची पर रोमांचक जीत दर्ज से सत्र में दूसरी बार BWF टूर सुपर 750 टूर्नामेंट के फाइनल में जा पहुंचीं।

जापानी हिना अकेची पर 73 मिनट में दर्ज की जीत

पूर्व विश्व नंबर एक भारतीय स्टार ने एरेना ग्रैंड पेरिस के कोर्ट नंबर एक पर एक घंटा 13 मिनट में निर्णीत तीन गेमों तक खिंचे रोमांचक मुकाबले में अकेची को 21-10, 20-22, 21-16 से परास्त किया। 31 वर्षीय सिंधु ने इससे पहले जुलाई में जापान ओपन सुपर 750 का खिताब जीता था। सिंधु के सामने फाइनल में दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर एक आन से यंग की चुनौती होगी।

आन से यंग के खिलाफ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर निगाहें

मौजूदा विश्व नंबर 11 सिंधु ने कहा, ‘मुझे मैच जीतकर फाइनल में पहुंचने की थोड़ी खुशी जरूर है, लेकिन मेरा काम अभी पूरा नहीं हुआ है। अब मेरा पूरा ध्यान अगले मुकाबले पर है और मुझे उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। मुझे आन से यंग को कड़ी टक्कर देनी होगी। मुकाबला कांटे का होना चाहिए। हर अंक अहम होगा। हम दोनों कई बार एक-दूसरे के खिलाफ खेल चुके हैं और वह लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। वह इस समय अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में है, लेकिन मेरा मानना है कि कल का दिन अलग होगा। मुझे बस मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।’

वहीं विश्व रैंकिंग में 22वें स्थान पर काबिज 21 वर्षीय अकेची ने इस सप्ताह वांग झी यी व पुतरी कुसुमा वारदानी जैसी खिलाड़ियों को हराकर अपनी क्षमता का परिचय दिया था। जापानी शटलर ने सिंधु को भी अपने चतुराई भरे शॉट और मजबूत रक्षात्मक खेल से परेशान किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ी निर्णायक क्षणों में अपना संयम बनाए रखने में सफल रहीं।

इस वर्ष सिंधु का प्रदर्शन देखें तो जापान ओपन का खिताब जीतने के अलावा वह नई दिल्ली में हुई विश्व चैम्पियनशिप और एशियाई खेलों में भी पदक जीतने के करीब पहुंची थीं। सिंधु ने कहा कि नई सहयोगी टीम तैयार करने और ट्रेनिंग के प्रति अधिक समझदारी भरा नजरिया अपनाने से उन्हें चोटों और नतीजों में निरंतरता में कमी के दौर से उबरने में मदद मिली। उन्होंने कहा, ‘पिछले करीब डेढ़ साल में काफी उतार-चढ़ाव रहे। वह मेरे लिए मुश्किल दौर था। ऐसे में मेरे लिए यह समझना बेहद जरूरी था कि मुझे पीछे लौटकर बिल्कुल शुरुआत से काम करना होगा।’

सिंधु ने कहा, ‘इरवानस्याह (आदि प्रतामा) के साथ काम करते हुए अब करीब दो वर्ष होने वाले हैं। हमने खेल विज्ञान विशेषज्ञ, फिजियो और ट्रेनर के साथ भी नयी टीम भी बनाई है। हमारे लिए एक टीम बनाना, शरीर की स्थिति को समझना और उसके अनुसार योजनाबद्ध तरीके से काम करना बेहद जरूरी था। इससे हमें काफी फायदा हुआ। मेरा मानना है कि केवल बहुत ज्यादा मेहनत करने के बजाय हमने अब अधिक समझदारी और बेहतर रणनीति के साथ काम करना शुरू किया है। यही बदलाव हमारे लिए कारगर साबित हुआ।’

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