लखनऊ, 24 अक्टूबर। प्रदेश के सभी 75 जिलों में महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और उनसे जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दीपदान, अखंड रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनकी आध्यात्मिक साधना और रामायण के माध्यम से दिए गए आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना है। इन आयोजनों में स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक दलों को भी अवसर दिया जाएगा।
चित्रकूट के लालापुर में होगा मुख्य आयोजन
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर चित्रकूट के लालापुर स्थित महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां रामायण पाठ, रामलीला, भजन संध्या और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके योगदान को याद किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत नदी घाट पर महर्षि वाल्मीकि की आरती और दीपदान का भी आयोजन होगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां आयोजन को सांस्कृतिक रूप से विशेष बनाएंगी। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। चित्रकूट के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा के मुताबिक, लालापुर की तपोस्थली पर होने वाले कार्यक्रम में रामलीला, महर्षि वाल्मीकि रामायण का पाठ, भजन संध्या और घाट पर आरती जैसे आयोजन प्रस्तावित हैं। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। आयोजन में हजारों लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी होंगे कार्यक्रम
वाल्मीकि जयंती पर चित्रकूट के अलावा प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष आयोजन किए जाएंगे। इनमें चित्रकूट का तुलसीदास आश्रम, राजापुर, कानपुर के बिठूर स्थित वाल्मीकि आश्रम, श्रावस्ती का वाल्मीकि आश्रम और अयोध्या, प्रयागराज सहित अन्य प्रमुख स्थल शामिल हैं। इन स्थानों पर धार्मिक परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना, दीपदान, भजन-कीर्तन और रामायण पाठ आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को महर्षि वाल्मीकि के साहित्यिक, आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान से परिचित कराया जाएगा। सरकार की योजना है कि प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों पर एक साथ कार्यक्रम आयोजित कर वाल्मीकि जयंती को व्यापक स्तर पर मनाया जाए। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
8, 12 और 24 घंटे तक होगा रामायण का पाठ
वाल्मीकि जयंती के अवसर पर कई स्थानों पर आठ, 12 और 24 घंटे तक लगातार महर्षि वाल्मीकि रामायण का पाठ आयोजित करने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना, हवन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। इन आयोजनों में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों और रामायण में वर्णित आदर्शों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। लव-कुश प्रसंग सहित रामायण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के मंचन के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का जोर केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहकर इन कार्यक्रमों को सांस्कृतिक और सामाजिक सहभागिता का माध्यम बनाने पर भी है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर कलाकारों, भजन मंडलियों और सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया आयोजन का उद्देश्य
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़े देशभर में लगभग 280 स्थानों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। राम वन गमन मार्ग से जुड़े स्थलों सहित इन स्थानों की पहचान और उनसे संबंधित परंपराओं को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदेश में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। इन आयोजनों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के विचारों, उनके साहित्यिक योगदान और रामायण की सांस्कृतिक विरासत को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। मंत्री के मुताबिक, पिछले वर्ष भी प्रदेश में 600 से अधिक मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इस बार भी आयोजन को व्यापक स्वरूप देने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तैयारियों के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रमों को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि सभी आयोजन स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिर परिसरों और कार्यक्रम स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ लोगों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। कार्यक्रमों में पूजा-अर्चना, हवन, रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी करेगा, ताकि धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकें।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच
वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक दलों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए जिला स्तर पर समितियों के माध्यम से कलाकारों का चयन किया जाएगा। आयोजन की रूपरेखा तैयार करने और कार्यक्रमों के संचालन में संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। संस्कृति विभाग के साथ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद और जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से संचालित करना और अधिक से अधिक लोगों तक उनकी जानकारी पहुंचाना है। स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने से क्षेत्रीय लोककला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को जोड़कर सरकार महर्षि वाल्मीकि की विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने की तैयारी कर रही है।
महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने की पहल
महर्षि वाल्मीकि को रामायण के रचयिता के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। उनकी रचना भारतीय साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रामायण के माध्यम से मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, करुणा और आदर्श जीवन जैसे मूल्यों को समाज तक पहुंचाया गया है। वाल्मीकि जयंती पर प्रदेशभर में होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन इन्हीं मूल्यों को याद करने का अवसर होंगे। रामायण पाठ, भजन-कीर्तन, दीपदान और रामलीला जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को महर्षि वाल्मीकि के योगदान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। 26 अक्टूबर को प्रदेश के सभी 75 जिलों में होने वाले इन आयोजनों में चित्रकूट के लालापुर की तपोस्थली प्रमुख केंद्र रहेगी। सरकार और प्रशासन की तैयारियों के बीच अब श्रद्धालुओं को इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और दीपदान कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलेगा।


