पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी बोले- निकट भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना बहुत कम
नई दिल्ली, 2 जुलाई। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद निकट भविष्य में पेट्रोल व डीजल के दाम कम होने की संभावना नगण्य है। उन्होंने यह भी कहा ही पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कोई भी कटौती इस बात पर निर्भर करेगी कि अगले कुछ हफ्तों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम कम बने रहें।
हरदीप पुरी ने बताया कि सरकारी तेल कम्पनियां अब भी उस कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं, जिसे करीब दो महीने पहले खरीदा गया था। उस समय पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे तनाव की वजह से तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं।
अगले 2-3 तीन माह तक गिरावट बनी रही तो विचार संभव
यह पूछे जाने पर कि क्या उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की उम्मीद करनी चाहिए, पुरी ने कहा, ‘हम आज उस कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के स्टॉक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे हमने दो महीने पहले खरीदा था। यदि कीमतों में यह गिरावट अगले 2-3 महीनों तक जारी रहती है तो हम इस पर विचार करेंगे। फिलहाल यह एक काल्पनिक स्थिति है।’
तेल कम्पनियां आमतौर पर कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल में रिफाइन (साफ) करने से कम से कम दो महीने पहले खरीदती हैं। यही वजह है कि अभी जो ईंधन बेचा जा रहा है, वह बड़े पैमाने पर अप्रैल और मई की शुरुआत में खरीदे गए कच्चे तेल से बना है। उस समय पश्चिम एशिया में तनाव के बीच वैश्विक तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं। पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने साफ किया कि खुदरा ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में कटौती का सवाल तभी उठेगा, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम बनी रहेंगी।
सरकारी तेल कम्पनियों को करीब 75,000 करोड़ रुपये का नुकसान
हरदीप पुरी ने यह भी खुलासा किया कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दौरान लागत से कम दाम पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) बेचने की वजह से सरकारी तेल कम्पनियों को 30 जून तक 74,781 करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
ईंधन की कीमतों को संभालने के सरकार के तरीके का बचाव भी किया
पुरी ने युद्ध और तनाव के इस दौर में ईंधन की कीमतों को संभालने के सरकार के तरीके का बचाव भी किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कई अन्य देशों की तुलना में भारत में पेट्रोल की कीमतों में बहुत कम बढ़ोतरी देखी गई। उनके अनुसार, जहां विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं में पेट्रोल के दाम करीब 20% और कई पड़ोसी देशों में लगभग 35% तक बढ़े, वहीं भारत में यह बढ़ोतरी सिर्फ 5.58% तक ही सीमित रही।
उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक बाजारों में सप्लाई (आपूर्ति) में आई बाधाओं के बावजूद, भारत ने फरवरी के आखिर से लेकर जून के अंत तक अपने 1.07 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों के नेटवर्क पर बिना किसी कमी या बंदी के लगातार ईंधन की उपलब्धता बनाए रखी।
नायरा की कटौती का सरकारी तेल कम्पनियों पर नहीं होगा असर
इस बीच, निजी तेल कम्पनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने एक जुलाई से अपने पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल के दाम पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर कम कर दिए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट शुरू होने के बाद दामों में कटौती करने वाली यह पहली बड़ी कम्पनी बन गई है।
हालांकि हरदीप पुरी ने साफ किया कि नायरा के इस कदम को पूरे उद्योग (इंडस्ट्री) के चलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट के समय नायरा कम्पनी ने ईंधन के दाम करीब पांच रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए थे। इसके उलट, सरकारी तेल कम्पनियों (OMCs) ने इस बोझ को खुद उठाया था और इसका असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ने दिया था। नायरा ने सिर्फ उस बढ़ी हुई कीमत को वापस लिया है, जिसे उसने पहले लागू किया था।
