लखनऊ, 30 जून। पिछले वर्ष अप्रैल से ईंधन अधिभार शुल्क (Fuel Surcharge) की मार झेल रहे यूपी के लगभग 3.7 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राहत प्रदान की है। इस क्रम में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के निर्देश पर फ्यूल सरचार्ज की दोबारा गणना की गई, जिसके बाद इसमें 4.43% की कमी की गई है। इसका सीधा फायदा जुलाई के बिजली बिलों में दिखाई देगा। दूसरे शब्दों में कहें तो जून में आए ज्यादा बिजली बिलों के बाद फ्यूल सरचार्ज में 4.43% कटौती के चलते जुलाई में राहत मिलेगी।
जून में इसलिए बढ़ गए थे बिजली के बिल
जून में जारी बिजली बिलों में 10% फ्यूल सरचार्ज जोड़ा गया था। इससे बिजली उपभोक्ताओं के मासिक बिलों में भारी बढ़ोतरी हुई। बिल बढ़ने के बाद राज्यभर से शिकायतें सामने आईं और सरचार्ज की गणना पर सवाल उठाए गए। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने माना कि फ्यूल सरचार्ज की गणना करते समय मार्च महीने की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ पुराने बकाया भुगतान भी जोड़ दिए गए थे। इससे सरचार्ज जरूरत से ज्यादा हो गया।
फ्यूल सरचार्ज की दोबारा गणना के निर्देश
मामला सामने आने के बाद UPERC ने पावर कॉरपोरेशन से जवाब मांगा और साफ किया कि फ्यूल सरचार्ज की गणना केवल संबंधित महीने में बिजली खरीद पर हुए वास्तविक खर्च के आधार पर ही की जानी चाहिए। पुराने बकाया को इसमें शामिल करना नियमों के अनुरूप नहीं है। आयोग के निर्देश के बाद जुलाई के लिए सरचार्ज की दोबारा गणना की गई, जिसमें दरें 4.43% कम हो गईं। इससे राज्य के सभी बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
358.31 करोड़ रुपये का लाभ होने की उम्मीद
अनुमानों के अनुसार, संशोधित सरचार्ज से पूरे उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं को लगभग 358.31 करोड़ रुपये का लाभ होने की उम्मीद है। कंज्यूमर काउंसिल ने फैसले का स्वागत किया। स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर काउंसिल के चेयरमैन अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अप्रैल में बिजली खरीदने की असल लागत शुरू में अनुमानित लागत से कम थी, जिससे जुलाई में फ्यूल सरचार्ज में कमी करना संभव हो पाया।
क्या होता है फ्यूल सरचार्ज?
फ्यूल सरचार्ज बिजली उत्पादन और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीद की लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर बिजली बिल में जोड़ा जाने वाला एक्स्ट्रा चार्ज है। यदि बिजली खरीद की लागत बढ़ती है तो सरचार्ज बढ़ता है जबकि लागत कम होने पर सरचार्ज भी घट जाता है और उपभोक्ताओं के बिल कम आते हैं।

