कानपुर नगर निगम में घमासान : सत्तारूढ़ भाजपा के 75 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफे की दी धमकी दी
कानपुर, 24 जून। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निगम में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षदों के बीच घमासान छिड़ गया है। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि सत्ताधारी पार्टी के 75 से अधिक पार्षदों ने पवन गुप्ता सहित अपनी ही पार्टी के छह कथित बागी पार्षदों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का खुला एलान कर दिया है।
पवन गुप्ता सहित 6 कथित बागी पार्षदों को पार्टी से निकालने की मांग
वार्ड संख्या 93 गोविंद नगर के पार्षद और भाजपा नेता सदन नवीन पंडित के नेतृत्व में एकजुट हुए कई पार्षदों ने शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि इन घोर अनुशासनहीन नेताओं को तुरंत पार्टी से बाहर नहीं किया गया तो वे सभी सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे।
बागी नेताओं पर गंभीर आपराधिक आरोप
नवीन पंडित ने कहा कि वे सभी भाजपा के बेहद अनुशासित कार्यकर्ता हैं, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। उन्होंने सीधे तौर पर पवन गुप्ता और अंकित मौर्य जैसे पार्षदों का नाम लेते हुए कहा कि इन लोगों ने सदन की शुरुआत से लेकर आखिरी तक सिर्फ बवाल काटा है। उन्होंने दावा किया कि बागी पार्षदों के खिलाफ उनके पास आपराधिक मामलों के कई पुख्ता और कानूनी साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर हत्या और जबरन वसूली जैसे मुकदमे चल रहे हैं, वे आज भाजपा पर ही मनगढ़ंत दोषारोपण कर रहे हैं।
महापौर की छवि धूमिल करने की साजिश
एकजुट हुए भाजपा पार्षदों का सीधा आरोप है कि ये छह तथाकथित पार्षद विपक्षियों और कुछ अदृश्य आकाओं के इशारे पर कानपुर की महापौर की बेदाग छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। ये बागी तत्व आज सोशल मीडिया के जरिए राज्य सरकार और भाजपा संगठन को बदनाम करने की एक गहरी साजिश रच रहे हैं। ये तत्व अपनी प्रशासनिक अज्ञानता के कारण जनता के बीच यह दुष्प्रचार फैला रहे हैं कि शहर के विकास कार्य केवल नगर आयुक्त करा रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि नगर निगम के भीतर किसी भी विकास कार्य और नीति निर्धारण का सर्वोच्च संवैधानिक दायित्व सिर्फ और सिर्फ महापौर का होता है।
मेयर और पवन गुप्ता में पुराना विवाद
दरअसल, अशोक नगर से भाजपा पार्षद पवन गुप्ता और मेयर प्रमिला पांडे के बीच चल रहे इस बड़े विवाद का मुख्य कारण कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई एक शिकायत है। पार्षद पवन गुप्ता ने पूर्व में मेयर के बेटे पर नगर निगम के सरकारी कार्यों में अवैध रूप से दखल देने और अन्य पार्षदों को धमकाने के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों से नाराज मेयर प्रमिला पांडे का एक वीडियो भी पूर्व में सामने आया था, जिसमें वह अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर बुरी तरह भड़कती हुई दिखाई दी थीं। सीएम योगी की सुरक्षा में सेंध का आरोप
इसी तनातनी के बीच हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कानपुर दौरे के दौरान एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया। मुख्यमंत्री के दौरे के वक्त बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद पवन गुप्ता और उनके कुछ सहयोगियों ने अधिकारियों को जबरन अपना ज्ञापन सौंप दिया। भाजपा के अन्य पार्षदों ने इस कृत्य को मुख्यमंत्री की सुरक्षा में बड़ी सेंध और बेहद आपत्तिजनक मानते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
उन्होंने इस अति-सुरक्षित क्षेत्र में बागी पार्षदों को संरक्षण देने वाले प्रशासनिक ‘स्लीपर सेल’ की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। नवीन पंडित ने संगठन को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की मर्यादा और साख को बचाने की है.
75 पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे की धमकी
नवीन पंडित ने शीर्ष नेतृत्व को दो टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, ‘संगठन हमारा माई-बाप है और हम उनके सामने ही अपनी बात रख रहे हैं। अब नेतृत्व को यह तय करना होगा कि या तो हमें पार्टी में रखिए या फिर इन छह काली भेड़ों को बाहर का रास्ता दिखाइए।’
उन्होंने साफ किया कि यदि सख्त काररवाई नहीं हुई तो कानपुर नगर निगम के 75 से अधिक राष्ट्रवादी पार्षद सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कूच करेंगे। वे किसी भी मंच पर इन 75 पार्षदों की सीधी परेड कराकर अपना पूर्ण बहुमत साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
