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कानपुर के छात्र ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, जताई सुरक्षा पर चिंता, देशहित में त्याग का लिया संकल्प

कानपुर के छात्र ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, जताई सुरक्षा पर चिंता, देशहित में त्याग का लिया संकल्प

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कानपुर, 15 जून। कानपुर के एक युवा छात्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आशुतोष यादव का कहना है कि पिछले 12 सालों में देश ने विकास और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, इसलिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। आशुतोष ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री के आह्वान का समर्थन करते हुए देशहित में हर संभव त्याग करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

कानपुर निवासी आशुतोष यादव एक प्रतियोगी छात्र हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग, सोने की खरीद में सावधानी और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने के आह्वान से प्रेरित होकर उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री के संदेश का समर्थन किया और देशहित में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

आशुतोष ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “भारतीय विदेश मुद्रा भंडार पर अनावश्यक दबाव को कम करने के उद्देश्य से पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से आह्वान किया था कि सीमित मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद का उपयोग करें। इसके साथ ही, उन्होंने लोगों से कम सोना खरीदने को भी कहा था। विदेशी वस्तुओं की खरीद को लेकर भी संयम बरतने की सलाह दी थी। मैंने पीएम मोदी के आह्वान को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।”

उन्होंने कहा, “समाचारों के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री की ओर से अपने सुरक्षा काफिले को सीमित करने की पहल की जानकारी मिली।” हालांकि आशुतोष ने प्रधानमंत्री की सादगी की सराहना की, लेकिन साथ ही सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई। आशुतोष ने कहा, “मेरी चिंता उनकी सुरक्षा को लेकर है। वे अपनी सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतते रहें, क्योंकि वैश्विक संदर्भ में भारत तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है तो कई देश और लोग हैं, जिन्हें भारत की यह प्रगति अखर रही होगी।”

छात्र आशुतोष यादव ने कहा कि मैंने अपने पत्र में पीएम मोदी की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही, मैंने पत्र में लिखा कि पीएम मोदी की पहल के साथ वे और उनका पूरा परिवार हैं। उन्होंने कहा, “किसी भी नागरिक के लिए देशप्रेम दिखाने का एक अवसर होता है कि वह सेना में जाकर देश की रक्षा करे, लेकिन जिसे सीमा पर जाकर देश की रक्षा का अवसर नहीं मिला है, वह अपने देशहित में काम करेगा, तो निश्चित रूप से देश सेवा कर पाएगा।

छात्र आशुतोष ने यह भी कहा कि वह देश के लिए कोई भी त्याग करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई भी वैश्विक संकट होता है तो हम सभी प्रभावित होते हैं, लेकिन भारतीय होने के नाते मुझे कुछ भी त्याग करना पड़ेगा तो हम इसके लिए बिल्कुल तैयार हैं।” उन्होंने देश की आर्थिक प्रगति की भी सराहना की। आशुतोष ने कहा, “भारत 2014 के बाद दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। इसके साथ ही, देश में हाईवे, एयरपोर्ट, आईआईटी और आईआईएम का निर्माण हुआ है।

उन्होंने कहा कि चिनाब ब्रिज, पूर्वोत्तर में रेल कनेक्टिविटी और मुंबई सी-लिंक जैसे प्रोजेक्ट देश के बदलते स्वरूप को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से निवेश और रोजगार दोनों बढ़ते हैं।युवाओं के लिए संदेश देते हुए आशुतोष ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों और असहमति को संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी रास्ते से बचना चाहिए। आशुतोष यादव का कहना है कि देशहित सर्वोपरि है और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ना ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

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