अहमदाबाद विमान हादसे का एक वर्ष पूरा : जांच रिपोर्ट का अब तक इंतजार, मुआवजा प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
नई दिल्ली, 12 जून। अहमदाबाद में पिछले वर्ष 12 जून को हुए भयावह AI-171 विमान हादसे का, जिसमें 241 यात्रियों सहित 270 से ज्यादा जानें गई थीं, शुक्रवार को एक वर्ष पूरा हो गया। लेकिन हादसे की जांच रिपोर्ट का अब तक इंतजार है।
हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों सहित 270 से ज्यादा जानें गई थीं
वेबसाइट ‘दिप्रिंट’ की रिपोर्ट के अनुसार एअर इंडिया का कहना है कि उसने प्रभावित परिवारों में से अधिकतर को मुआवजा दे दिया है और अब तक लगभग 300 करोड़ रुपये मुआवजे व अनुग्रह सहायता के रूप में वितरित किए जा चुके हैं।
लगभग 300 करोड़ रुपये मुआवजे व अनुग्रह सहायता के रूप में दिए जा चुके हैं
लेकिन हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है और एयरलाइन द्वारा अंतिम समझौते (फाइनल सेटलमेंट) के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पिछले कई दशकों की भारत की सबसे बड़ी विमान दुर्घटना के बाद की स्थिति अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है। जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट जल्द जारी होने की संभावना नहीं है क्योंकि जांचकर्ता अब भी हादसे के तकनीकी और परिचालन संबंधी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि विमान के अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उसमें सवार 241 लोगों की मौत हो गई थी। विमान में सवार सिर्फ एक यात्री भारतीय मूल के ब्रिटिश विश्वास कुमार रमेश की जान बची थी। वहीं दुर्घटनाग्रस्त विमान निकट स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की इमारत से जा टकराया था। परिणामस्वरूप हॉस्टल में मौजूद छात्रों सहित लगभग 30 अन्य लोगों की मौत हुई थी।
एअर इंडिया के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों के 96 प्रतिशत मामलों में 25-25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं जमीन पर घायल हुए लोगों में से 94 प्रतिशत को उनकी चोटों और आजीविका के नुकसान के आधार पर या तो अंतरिम मुआवजा या पूरा और अंतिम मुआवजा मिल चुका है। टाटा समूह के AI-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट ने भी एन. चंद्रेशेखरन द्वारा घोषित क करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता 91 प्रतिशत प्रभावित परिवारों को वितरित कर दी है।
हालांकि, मुआवजा प्रक्रिया को लेकर कुछ परिवारों और पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने सवाल उठाए हैं। AI-171 हादसे के पीड़ितों और उनके परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे अमेरिकी विमानन वकील माइक एंड्रयूज ने कहा, ‘परिवारों को एअर इंडिया की ओर से प्रतिरोध और अनिच्छा का सामना करना पड़ रहा है। दावों का निबटारा अब तक नहीं हुआ है। कुछ परिवारों से ऐसे समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर करने को कहा जा रहा है, जिनसे वे भविष्य में बोइंग के खिलाफ दावा करने का अधिकार छोड़ सकते हैं। यदि ऐसे समझौते स्वीकार कर लिए जाते हैं तो हादसे का कारण तय होने से पहले ही बोइंग को कानूनी काररवाई से सुरक्षा मिल सकती है।’
उक्त हादसे में मृत गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी राधिका मिश्रा ने भी सवाल उठाया कि जब तक जांच एजेंसियां हादसे का कारण तय नहीं कर लेतीं, तब तक क्या परिवारों से अंतिम समझौते पर विचार करने के लिए कहा जाना चाहिए?
एअर इंडिया ने परिवारों पर दबाव डालने से किया इनकार
इस वर्ष की शुरुआत में कई पीड़ितों के परिवारों ने ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक करने की मांग भी की थी। उन्होंने अधिकारियों से जांच की प्रगति के बारे में अधिक जानकारी देने की अपील की थी। उनका कहना था कि केवल मुआवजा देने से जवाबदेही तय नहीं होती और न ही परिवारों को पूरी तरह संतोष मिल सकता है।
हालांकि एअर इंडिया ने इस बात से इनकार किया है कि परिवारों पर किसी तरह का दबाव डाला जा रहा है। एयरलाइन का कहना है कि अंतिम मुआवजे के प्रस्ताव को स्वीकार करने की ‘बिल्कुल कोई समय-सीमा नहीं’ है और दावेदार चाहें तो विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की अंतिम रिपोर्ट आने तक इंतजार कर सकते हैं और उसके बाद ही किसी समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
एअर इंडिया ने रूपाणी की बेटी को भेजे गए एक ईमेल में, कहा, ‘हमने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता लेने और जांच रिपोर्ट का इंतजा करने के बीच किसी तरह का दबाव महसूस न हो।’
