लखनऊ, 15 सितंबर। भारत में भगवान हनुमान को समर्पित कई ऐसे मंदिर हैं, जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी खास पहचान रखते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद इन मंदिरों की अपनी विशिष्ट मान्यताएं, धार्मिक परंपराएं और स्थापत्य शैली हैं। यही वजह है कि इन स्थानों पर श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी पहुंचते हैं। हनुमान जन्मोत्सव और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। कहीं बजरंगबली लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं तो कहीं उनके पंचमुखी स्वरूप के दर्शन होते हैं। आइए जानते हैं देश के कुछ प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों के बारे में।
- प्रयागराज का लेटे हुए हनुमान मंदिर
प्रयागराज में संगम के समीप स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर की सबसे खास विशेषता यहां विराजमान भगवान हनुमान की विशाल लेटी हुई प्रतिमा है। हनुमान जी का यह स्वरूप मंदिर को दूसरी जगहों से अलग पहचान देता है। लगभग 20 फीट लंबी बताई जाने वाली प्रतिमा श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती है। प्रयागराज आने वाले यात्री संगम क्षेत्र की यात्रा के दौरान इस मंदिर में भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हनुमान जन्मोत्सव और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- अयोध्या की हनुमानगढ़ी
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में स्थित हनुमानगढ़ी देश के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में गिनी जाती है। अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह मंदिर प्रमुख धार्मिक पड़ाव है। ऊंचाई पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर परिसर में पहुंचते ही भक्तिमय वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मान्यता है कि भगवान हनुमान अयोध्या की रक्षा करते थे और इसी वजह से यह स्थान उनके निवास के रूप में प्रसिद्ध हुआ। मंदिर में हनुमान जी की पूजा के साथ चोला चढ़ाने की परंपरा भी काफी लोकप्रिय है। अयोध्या में धार्मिक पर्यटन का विस्तार होने के साथ हनुमानगढ़ी में भी देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
- राजस्थान का मेहंदीपुर बालाजी
राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भगवान हनुमान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। दो पहाड़ियों के बीच स्थित इस मंदिर में हनुमान जी को बालाजी के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धतियों के लिए जाना जाता है। देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हनुमान जन्मोत्सव जैसे विशेष अवसरों पर मंदिर में भक्तों की भीड़ काफी बढ़ जाती है। धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय परंपराओं और वातावरण के कारण मेहंदीपुर बालाजी राजस्थान के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में भी अपनी जगह रखता है।
- सालासर बालाजी मंदिर
राजस्थान के चूरू जिले में स्थित सालासर बालाजी मंदिर भी भगवान हनुमान के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। यहां हनुमान जी को बालाजी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर की विशिष्ट पहचान यहां स्थापित भगवान हनुमान की दाढ़ी और मूंछ वाली प्रतिमा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सालासर बालाजी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हनुमान जन्मोत्सव और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। इन मौकों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। धार्मिक मान्यताओं, मंदिर की परंपराओं और भक्तिमय वातावरण के कारण सालासर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में भी गिना जाता है।
- रामेश्वरम का पंचमुखी हनुमान मंदिर
तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर भगवान हनुमान के विशिष्ट पंचमुखी स्वरूप के लिए जाना जाता है। मंदिर में हनुमान जी के पांच मुखों वाले स्वरूप को लेकर धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इस स्वरूप में हनुमान, नरसिंह, गरुड़, वराह और हयग्रीव के मुख बताए जाते हैं। मंदिर की विशिष्ट प्रतिमा और धार्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों का भी ध्यान आकर्षित करता है। रामेश्वरम पहले से ही देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। ऐसे में यहां आने वाले यात्रियों के लिए पंचमुखी हनुमान मंदिर भी महत्वपूर्ण आकर्षण है।
- आस्था के साथ पर्यटन का भी केंद्र
भारत के ये प्रसिद्ध हनुमान मंदिर धार्मिक आस्था के साथ देश की सांस्कृतिक और पर्यटन परंपरा को भी समृद्ध करते हैं। इन मंदिरों में दर्शन के साथ यात्रियों को स्थानीय धार्मिक परंपराओं, स्थापत्य और सांस्कृतिक वातावरण को करीब से जानने का अवसर मिलता है। हनुमान जन्मोत्सव और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। यही वजह है कि ये धार्मिक स्थल आस्था के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र भी बन चुके हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में मंदिरों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख आस्था और प्रचलित परंपराओं के आधार पर किया गया है। इन्हें ऐतिहासिक या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में न लिया जाए।


