अमित शाह ने NCDC को 25 वर्षों का रोडमैप तैयार करने के दिए निर्देश, 2030 तक पूर्वोत्तर में 8 लाख रोजगार का लक्ष्य

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गुरुवार को यहां राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की महापरिषद की 93वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक में सहकारी क्षेत्र के वित्तपोषण, ग्रामीण आजीविका, संस्थागत सुधार और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के अनुरूप सहकारिता को सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी विकास का सशक्त माध्यम बनाना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने NCDC को अगले 25 वर्षों के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने तथा संस्थागत ढांचे, पूंजी जुटाने और कार्यप्रणाली में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए।

NCDC के लिए पिछले पांच साल स्वर्णिम काल

शाह ने पिछले पांच वर्षों में NCDC के वित्तीय प्रदर्शन और संस्थागत विस्तार की सराहना करते हुए इस अवधि को निगम के लिए एक प्रकार से स्वर्णिम काल बताया। उन्होंने कहा कि निगम ने ऋण स्वीकृति और वित्तीय संवितरण में उल्लेखनीय वृद्धि की है तथा नेट एनपीए को शून्य बनाए रखा है। देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में NCDC की उपस्थिति स्थापित होना सहकारी आंदोलन को अंतिम छोर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

छोटे किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचे लाभ

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सहकारिता का उद्देश्य केवल सहकारी संस्थाओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है। छोटे किसानों, पशुपालकों, मछुआरों, ग्रामीण महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सहकारिता के माध्यम से आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि अमूल, इफको और लिज्जत पापड़ जैसी संस्थाओं ने साबित किया है कि सहकारिता के मूल्यों के साथ पेशेवर प्रबंधन अपनाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी संस्थाएं विकसित की जा सकती हैं।

अगले 25 वर्षों के लिए बनेगा व्यापक रोडमैप

अमित शाह ने NCDC की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संस्थागत संरचना, वित्तीय संसाधन जुटाने, वित्तीय स्वायत्तता और पेशेवर कार्यप्रणाली में सुधार के लिए व्यापक योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने सहकारी क्षेत्र के अनुभवी प्रतिनिधियों और पेशेवर विशेषज्ञों का समूह गठित करने तथा इस विषय पर कार्यशाला आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने 31 मार्च, 2027 के बाद विशेष बैठक आयोजित कर विस्तृत प्रस्तुतीकरण और चर्चा करने तथा दिसम्बर, 2027 तक आवश्यक निर्णयों की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया।

प्रशासन पेशेवर, दृष्टिकोण सहकारिता आधारित हो

शाह ने कहा कि सहकारी संस्थाओं का प्रशासन पेशेवर होना चाहिए, जबकि उनका मूल दृष्टिकोण सहकारिता के सिद्धांतों पर आधारित रहना चाहिए। उन्होंने सरकारी सहायता और सरकारी बैंकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए नए वित्तीय एवं संगठनात्मक मॉडल विकसित करने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, NCDC को अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ाने के साथ सहकारी संस्थाओं की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए नए संसाधन और भागीदारी मॉडल विकसित करने होंगे।

सहकारी संस्थाओं के विकास में NCDC की अहम भूमिका

उन्होंने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL), भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL), भारत टैक्सी, सहकार सारथी और शहरी सहकारी बैंकों के अम्ब्रेला संगठन NUCFDC जैसी संस्थाओं के विकास में NCDC की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के विस्तार के साथ छोटे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों की आजीविका में प्रत्यक्ष सुधार लाना भी निगम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मछुआरा परिवारों की आय बढ़ाने पर जोर

मत्स्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए करीब 100 ट्रॉलरों को NCDC के माध्यम से वित्तीय सहायता दी गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं से मछुआरा परिवारों की आय बढ़ाने, बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य के अवसरों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने निगम को इस तरह की जमीनी स्तर की पहलों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

सहकारी चीनी मिलों के लिए नए कारोबारी मॉडल

अमित शाह ने सहकारी चीनी मिलों के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था पर आधारित नए व्यावसायिक मॉडल विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने महाराष्ट्र के कोल्हापुर और पुणे में प्रस्तावित बहुराज्यीय सहकारी पहलों का उल्लेख करते हुए साझा प्रसंस्करण और औद्योगिक सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। इससे उन सहकारी चीनी मिलों को लाभ मिल सकेगा, जो अपने स्तर पर बड़े निवेश या आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने में सक्षम नहीं हैं।

युवाओं को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने की पहल

केंद्रीय मंत्री ने ‘सहकार मित्र’ कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण और इंटर्नशिप पूरी करने वाले योग्य युवाओं को नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे आधुनिक प्रबंधन, व्यावसायिक दक्षता और पेशेवर नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बनास डेयरी के सफल प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर उसके अनुभवों को NCDC की भावी कार्यप्रणाली में शामिल करने पर भी जोर दिया।

2030 तक पूर्वोत्तर में 8 लाख रोजगार का लक्ष्य

शाह ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को वर्ष 2030 तक पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष सहकारी परियोजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता से पूर्वोत्तर की आय में करीब 32,800 करोड़ रुपए की वृद्धि और लगभग आठ लाख रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। उन्होंने NCDC के पूर्वोत्तर स्थित कार्यालयों को राज्य सरकारों के सहयोग से व्यावहारिक परियोजनाएं तैयार करने और उनके लिए आवश्यक वित्तपोषण उपलब्ध कराने को कहा।

वित्तीय संवितरण बढ़ाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य

उन्होंने NCDC को वित्तीय संवितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपए, 2027-28 के लिए 2.10 लाख करोड़ रुपए और 2028-29 के लिए 2.50 लाख करोड़ रुपए के लक्ष्यों का उल्लेख किया। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2029-30 और 2030-31 के लिए लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपए के संवितरण की दिशा में काम करने पर जोर दिया। उन्होंने डेयरी, मत्स्यपालन और सहकारी बैंकिंग समेत विभिन्न क्षेत्रों की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए निगम की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

बैंकों के साथ कंसोर्टियम और सह-वित्तपोषण मॉडल

अमित शाह ने NCDC को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), राज्य सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के साथ कंसोर्टियम तथा सह-वित्तपोषण मॉडल विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने का सुझाव दिया। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय की ओर से मिले सहयोग की भी सराहना की। साथ ही दुग्ध सहकारी क्षेत्र की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए वित्तपोषण मॉडल विकसित करने पर जोर दिया।

अक्टूबर 2026 तक 4.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

बैठक में प्रस्तुत वित्तीय विवरणों के अनुसार, सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से अक्टूबर 2026 तक NCDC ने सहकारी संस्थाओं को 4.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की है। वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने 1,55,408 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी और 1,27,596 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की। इसी अवधि में निगम ने 1,475 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। उसकी ऋण वसूली दर 99.84% रही और नेट एनपीए शून्य दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2020-21 में निगम का वार्षिक संवितरण 24,733 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,27,596 करोड़ रुपये हो गया।

NCDC संशोधन अधिनियम से बढ़ेंगे वित्तपोषण के अवसर

बैठक में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) अधिनियम, 2026 के महत्व पर भी चर्चा हुई। इस संशोधन का उद्देश्य सहकारी विकास के लिए वित्तीय सहायता के माध्यमों, संस्थागत भागीदारी और इक्विटी व शेयर पूंजी के जरिए निवेश के अवसरों का विस्तार करना है। केंद्र सरकार ने NCDC के लिए 2,000 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता को मंजूरी दी है। इसके आधार पर निगम को चार वर्षों में बाजार से 20,000 करोड़ रुपये जुटाने की व्यवस्था की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस पहल के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 9,380 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026-27 में 25 अक्टूबर तक 6,172 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया।

सहकार नवाचार योजना के तहत 25 लाख रुपये तक अनुदान

सहकारी संस्थाओं में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए NCDC ने ‘सहकार नवाचार योजना’ शुरू की है। इसके तहत पात्र सहकारी संस्थाओं को अधिकतम 25 लाख रुपए तक की शत-प्रतिशत अनुदान सहायता देने का प्रावधान है। योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निधि कोष बनाया गया है। इसमें 20% राशि पूर्वोत्तर, पहाड़ी क्षेत्रों और कमजोर वर्गों की सहकारी संस्थाओं के लिए आरक्षित है। अब तक पांच सहकारी संस्थाओं को कुल 85 लाख रुपये की अनुदान सहायता मंजूर की गई है।

सहकारी क्षेत्र में 1,863 किसान उत्पादक संगठन पंजीकृत

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए NCDC किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के गठन और संवर्धन में भी भूमिका निभा रहा है। निगम ने सहकारी क्षेत्र में 1,863 FPOs का पंजीकरण किया है, जिनमें प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से गठित 1,117 FPOs शामिल हैं। अक्टूबर 2026 तक FPOs और संबंधित संस्थाओं को 356.90 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी जोर

NCDC की लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय सहकारिता अनुसंधान एवं विकास अकादमी (LINAC) और उसके क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में 227 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 21,688 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य आधुनिक प्रबंधन, डिजिटल लेखांकन, वित्तीय अनुशासन, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करना है।

वित्तीय प्रदर्शन और भावी योजनाओं की समीक्षा

महापरिषद की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लेखापरीक्षित वार्षिक लेखों, वार्षिक रिपोर्ट और वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा की गई। इसके साथ आगामी वर्षों के वित्तीय कार्यक्रमों, संसाधन जुटाने और सहकारी क्षेत्र की बढ़ती वित्तपोषण आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श हुआ।

अमित शाह ने NCDC के अधिकारियों, महापरिषद के सदस्यों और कर्मचारियों को वित्तीय प्रदर्शन, शून्य नेट एनपीए तथा संस्थागत विस्तार के लिए बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि NCDC अपनी वित्तीय क्षमता और पेशेवर कार्यप्रणाली का विस्तार करते हुए ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सर्वसमावेशी विकास को गति मिलेगी।

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