गोरखपुर, 8 नवंबर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को एक बार फिर गोरखपुर के वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में दीपावली मनाएंगे। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीण अपने घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट में जुटे हैं। हर परिवार को अपने ‘योगी बाबा’ के स्वागत का बेसब्री से इंतजार है। यहां दीपावली की खुशियां मुख्यमंत्री के आगमन के साथ और भी खास हो जाती हैं। यही वजह है कि गांव के लोग कहते हैं कि अब बाबा के बिना उनका त्योहार अधूरा लगता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर साल वनटांगिया परिवारों के बीच पहुंचकर दीपोत्सव मनाते हैं। सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी रहते हुए शुरू हुई यह परंपरा मुख्यमंत्री बनने के बाद भी लगातार जारी है। इस बार भी वह ग्रामीणों के साथ दीपावली मनाने के साथ 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इनमें सड़क निर्माण, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
100 साल तक उपेक्षा झेलता रहा वनटांगिया समुदाय
गोरखपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर कुसम्ही जंगल में बसा जंगल तिकोनिया नंबर तीन कभी बदहाली और उपेक्षा का प्रतीक हुआ करता था। ब्रिटिश शासन के दौरान रेलवे स्लीपर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर साखू के पेड़ों की कटाई की गई थी। जंगल को दोबारा विकसित करने के लिए अंग्रेजों ने गरीब भूमिहीनों और मजदूरों को यहां बसाया। इसके लिए वर्मा देश की ‘टांगिया विधि’ अपनाई गई। जंगल में पौधों की देखभाल करने वाले ये परिवार आगे चलकर वनटांगिया कहलाए।
वर्ष 1918 में कुसम्ही जंगल के पांच क्षेत्रों में इनकी बस्तियां बसाई गईं। इनमें जंगल तिकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा शामिल हैं। इसके अलावा महराजगंज के जंगलों में भी वनटांगिया समुदाय के 18 गांव बसे। देश आजाद होने के बाद भी वनटांगियों की जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। उनके पास न नागरिकों जैसे अधिकार थे और न ही सरकारी सुविधाएं। जंगल में झोपड़ी बनाने के अलावा स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं थी। पेड़ों के पत्ते बेचकर और मजदूरी करके परिवारों का गुजारा होता था। वन विभाग की ओर से बेदखली की कार्रवाई का डर भी हमेशा बना रहता था।
1998 में सांसद बने योगी आदित्यनाथ, वनटांगियों की बदली जिंदगी
वर्ष 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर के सांसद बने। इसी दौरान उन्हें वनटांगिया बस्तियों की बदहाल स्थिति की जानकारी मिली। उन्होंने सबसे पहले इन गांवों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का संकल्प लिया। इसके लिए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं एमपी कृषक इंटर कॉलेज और एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ के साथ गोरखनाथ मंदिर के गुरु श्री गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा को लगाया गया। जंगल तिकोनिया नंबर तीन में वर्ष 2003 से शुरू हुए प्रयास 2007 तक असर दिखाने लगे। ग्रामीण रामगणेश आज भी उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं, ‘महाराज जी नहीं आते तो बदहाली में ही मर-खप जाते।’
बच्चों की पढ़ाई के लिए दर्ज हुआ मुकदमा, संघर्ष के बाद बना स्कूल
वनटांगिया बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की राह भी आसान नहीं थी। वर्ष 2009 में योगी आदित्यनाथ के सहयोगी जंगल तिकोनिया नंबर तीन में बच्चों की पढ़ाई के लिए एस्बेस्टस शीट डालकर अस्थायी स्कूल बना रहे थे। वन विभाग ने इसे अवैध बताते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया। हालांकि, योगी आदित्यनाथ ने अपने तर्कों से विभाग को निरुत्तर किया और स्कूल का निर्माण संभव हो सका। गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से संचालित यह विद्यालय आज भी वनटांगिया समुदाय के लिए शिक्षा की नई शुरुआत का प्रतीक है। इसी वर्ष योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया परिवारों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू की। यह केवल त्योहार मनाने की पहल नहीं थी, बल्कि उन परिवारों को सामाजिक सम्मान और अपनापन देने का प्रयास भी था, जो लंबे समय तक उपेक्षित रहे थे।
मुख्यमंत्री बनने के बाद वनटांगिया गांवों को मिला राजस्व ग्राम का दर्जा
वनटांगिया समुदाय को अधिकार दिलाने की लड़ाई योगी आदित्यनाथ ने संसद में भी उठाई। वर्ष 2010 में उन्हें अपने स्थान पर बने रहने का अधिकार पत्र दिलाने की दिशा में पहल की गई। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल के पहले ही वर्ष में वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाया। इसके बाद गोरखपुर और महराजगंज के 23 वनटांगिया गांवों में विकास की नई राह खुली। इन गांवों में पक्की सड़कें, बिजली, पेयजल, आवास, शौचालय, स्कूल, स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाएं पहुंचीं। पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड, आधार कार्ड, रसोई गैस और कृषि योग्य भूमि के पट्टे का लाभ मिला। बच्चों को स्कूलों में शिक्षा मिलने लगी और पात्र लोगों को वृद्धावस्था, विधवा तथा दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं से जोड़ा गया।
‘अब त बाबा के बिना तिउहार अधूरा लगेला’
जंगल तिकोनिया नंबर तीन के निवासी रामगणेश के शब्दों में आज भी बदलाव की कहानी झलकती है। वह कहते हैं, ‘गांव में जवन भी काम लउकत बा, सब बाबा के ही करावल है। नाइ त के पूछे वाला रहल। बाबा के गोड़ पड़ल त समझा कि उदयार हो गइल।’ गांव में पक्के मकान, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, खेती के लिए जमीन और बच्चों के स्कूल जैसी सुविधाओं का जिक्र करते हुए वह कहते हैं, ‘अब त बाबा के बिना तिउहार अधूरा लगेला।’
रामगणेश का कहना है कि अगर योगी आदित्यनाथ की नजर वनटांगिया समुदाय पर नहीं पड़ती तो उनकी जिंदगी बदहाली में ही गुजर जाती। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के दीपावली पर गांव पहुंचने का इंतजार हर परिवार को रहता है। मुख्यमंत्री भी हर साल बच्चों को मिठाई, कॉपी-किताबें और आतिशबाजी के उपहार देकर पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
82.41 करोड़ की 52 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वनटांगिया परिवारों के साथ दीपावली मनाने के साथ विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे। कुल 82 करोड़ 41 लाख 29 हजार रुपये की लागत वाली 52 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इनमें 77 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये की लागत वाले 26 कार्यों का शिलान्यास और 4 करोड़ 43 लाख 79 हजार रुपये के 26 कार्यों का लोकार्पण शामिल है।
इन परियोजनाओं में रजही चौराहे से जंगल तिकोनिया नंबर तीन होते हुए पिपराइच मार्ग तक इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण प्रमुख है। इस पर 3 करोड़ 65 लाख 11 हजार रुपये खर्च होंगे। सड़क बनने से वनटांगिया परिवारों को आवागमन में काफी सहूलियत मिलेगी।
कुसम्ही जंगल में बनेगा ईको पार्क, पिपराइच को मिलेगा वैश्विक नगर बाजार
मुख्यमंत्री कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच नगर पंचायत में वैश्विक नगर बाजार का भी शिलान्यास करेंगे। कुसम्ही जंगल में 4 करोड़ 84 लाख 81 हजार रुपये की लागत से ईको पार्क विकसित किया जाएगा। इसमें स्विस कॉटेज समेत पर्यटकों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वहीं, पिपराइच में 1 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपये की लागत से वैश्विक नगर बाजार बनाया जाएगा। इससे स्थानीय बाजार व्यवस्था बेहतर होने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
वनटांगिया गांव में इस बार भी दीपावली की रौनक कुछ अलग होगी। घरों में जलने वाले दीपों के साथ ग्रामीणों की आंखों में अपने ‘योगी बाबा’ के स्वागत की खुशी दिखाई देगी। कभी नागरिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने वाले इस समुदाय के लिए दीपावली अब सिर्फ रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि बदली हुई जिंदगी और नए भविष्य का उत्सव भी बन चुकी है।


