लखनऊ, 29 अगस्त। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से लेकर द्वारका, वृंदावन, जयपुर, नाथद्वारा और उडुपी तक देशभर में कई ऐसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। जन्माष्टमी के मौके पर इन मंदिरों की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, झांकियों और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर अगर आप धार्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो देश के इन प्रमुख कृष्ण मंदिरों को अपनी यात्रा सूची में शामिल कर सकते हैं। इन मंदिरों की खासियत सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि इनसे जुड़ी प्राचीन परंपराएं, वास्तुकला और मान्यताएं भी हैं।
तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर, केरल
केरल का तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की प्राचीनता करीब डेढ़ हजार वर्ष बताई जाती है। यहां भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं और स्थानीय मान्यताएं प्रचलित हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा का धार्मिक महत्व देशभर में प्रसिद्ध है। यहां स्थित द्वारकाधीश मंदिर प्रमुख कृष्ण मंदिरों में शामिल है। मंदिर की वास्तुकला और धार्मिक परंपराएं श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करती हैं। जन्माष्टमी के दौरान मथुरा में कृष्ण जन्मोत्सव का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। मंदिरों में देर रात तक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम चलते हैं। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा पहुंचते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका
गुजरात के द्वारका में स्थित द्वारकाधीश मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। इसे जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और यह चार धामों में पश्चिमी धाम माना जाता है। गोमती नदी के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। जन्माष्टमी पर यहां विशेष पूजा और उत्सव आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर मंदिर परिसर में खास सजावट की जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्री जुगल किशोर जी मंदिर, मथुरा
मथुरा के प्राचीन कृष्ण मंदिरों में श्री जुगल किशोर जी मंदिर का भी विशेष स्थान है। मंदिर की धार्मिक परंपराएं और कृष्ण भक्ति से जुड़ी मान्यताएं इसे श्रद्धालुओं के बीच खास बनाती हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार, यहां विराजमान भगवान के स्वरूप को वृंदावन से लाकर स्थापित किया गया था। जन्माष्टमी पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
श्री बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन
वृंदावन का श्री बांके बिहारी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में शामिल है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और रास परंपरा से वृंदावन का गहरा धार्मिक संबंध माना जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर और आसपास के इलाकों में भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलता है। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान वृंदावन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
गोविंद देवजी मंदिर, जयपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित गोविंद देवजी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख मंदिरों में विशेष स्थान रखता है। यह सिटी पैलेस परिसर में स्थित है, जहां भगवान कृष्ण के गोविंद देवजी स्वरूप के साथ राधा जी की पूजा की जाती है। मंदिर की स्थापना जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय से जुड़ी मानी जाती है। प्रचलित परंपरा के अनुसार, गोविंद देवजी की प्रतिमा को वृंदावन से जयपुर लाया गया था। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है और पूरा परिसर भक्ति के रंग में रंगा नजर आता है।
वेणुगोपाल स्वामी मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक का वेणुगोपाल स्वामी मंदिर अपनी प्राचीनता और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। इसका निर्माण होयसल काल से जोड़ा जाता है। मंदिर से जुड़ी कई स्थानीय धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर लंबे समय तक पानी में डूबा रहा और बाद में इसे दोबारा स्थापित किया गया। भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।
उडुपी श्रीकृष्ण मठ, कर्नाटक
कर्नाटक का उडुपी श्रीकृष्ण मठ दक्षिण भारत के प्रमुख कृष्ण तीर्थों में शामिल है। इसकी स्थापना वैष्णव संत माधवाचार्य से जुड़ी मानी जाती है। मंदिर की सबसे खास परंपराओं में से एक यहां भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन की व्यवस्था है। भक्त एक विशेष खिड़की, जिसे ‘कनकन किंडी’ कहा जाता है, से भगवान के दर्शन करते हैं। जन्माष्टमी पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा
राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना के लिए प्रसिद्ध है। यह वैष्णव परंपरा के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है और देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। श्रीनाथजी की पूजा से जुड़ी विशिष्ट परंपराएं इस मंदिर को देश के अन्य कृष्ण मंदिरों से अलग पहचान देती हैं।
जगन्नाथ मंदिर, पुरी
ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। धार्मिक परंपरा में भगवान जगन्नाथ को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप के रूप में माना जाता है। यहां वे अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। हालांकि पुरी की रथ यात्रा सबसे प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है, लेकिन जन्माष्टमी समेत भगवान कृष्ण से जुड़े अन्य पर्वों का भी यहां विशेष महत्व है। मंदिर की प्राचीन परंपराएं और स्थापत्य इसे श्रद्धालुओं के लिए खास बनाते हैं।
सांवलिया सेठ मंदिर, राजस्थान
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित सांवलिया सेठ मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। यहां भगवान कृष्ण की पूजा ‘सांवलिया सेठ’ के नाम से की जाती है। व्यापार और आर्थिक समृद्धि की कामना करने वाले श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर को लेकर विशेष आस्था है। मंदिर का संबंध मेवाड़ की कृष्ण भक्ति परंपरा और मीरा बाई से जुड़ी मान्यताओं से भी बताया जाता है। जन्माष्टमी पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
जन्माष्टमी पर बढ़ जाती है इन मंदिरों की रौनक
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी देशभर के कृष्ण मंदिरों में विशेष उत्साह के साथ मनाई जाती है। मथुरा और वृंदावन में जहां कृष्ण जन्मभूमि और उनकी बाल लीलाओं से जुड़ी परंपराएं देखने को मिलती हैं, वहीं द्वारका, जयपुर, नाथद्वारा और उडुपी में कृष्ण भक्ति की अलग-अलग परंपराओं की झलक मिलती है। अगर आप जन्माष्टमी पर धार्मिक यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो इन मंदिरों में दर्शन के साथ वहां की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से जान सकते हैं।


