लौंग का छोटा सा टुकड़ा, बड़े फायदे! दांत दर्द से लेकर ब्लड शुगर तक, जानिए क्या कहती है रिसर्च

नई दिल्ली, 29 अगस्त। भारतीय रसोई में लौंग का इस्तेमाल सदियों से मसाले के तौर पर किया जाता रहा है। आकार में छोटी दिखने वाली लौंग खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के साथ-साथ अपने प्राकृतिक गुणों के लिए भी जानी जाती है। चाय, सब्जी और मसालेदार व्यंजनों से लेकर सर्दी-जुकाम और दांत दर्द जैसी परेशानियों में भी लोग इसका घरेलू तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

लौंग में यूजेनॉल, फ्लेवोनॉयड्स और कई अन्य प्राकृतिक पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में इन तत्वों में एंटीऑक्सीडेंट, सूजन कम करने और कुछ बैक्टीरिया व फंगस के खिलाफ काम करने जैसे गुण देखे गए हैं। हालांकि, लौंग को किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं है।

दांत दर्द में मिल सकती है अस्थायी राहत

लौंग का सबसे प्रचलित घरेलू इस्तेमाल दांत दर्द के लिए किया जाता है। इसमें मौजूद यूजेनॉल दर्द को कुछ समय के लिए कम करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि दांतों से जुड़े कुछ उपचारों में भी यूजेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है।

हल्के दांत दर्द में कुछ लोग लौंग को दांत के पास रखते या हल्का चबाते हैं। इससे अस्थायी राहत मिल सकती है। लेकिन अगर दांत में लगातार दर्द, मसूड़ों में सूजन, पस या संक्रमण जैसे लक्षण हैं, तो केवल लौंग पर निर्भर रहने के बजाय डेंटिस्ट से जांच कराना जरूरी है।

मुंह की ताजगी के लिए भी इस्तेमाल

लौंग में ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जो कुछ प्रकार के बैक्टीरिया के खिलाफ काम कर सकते हैं। खाना खाने के बाद लौंग चबाने से मुंह में कुछ समय के लिए ताजगी महसूस हो सकती है। हालांकि, यह ब्रश करने, फ्लॉसिंग या नियमित दांतों की सफाई का विकल्प नहीं है।

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है लौंग

शरीर में बनने वाले कुछ फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट इनसे होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। लौंग में मौजूद यूजेनॉल और अन्य प्राकृतिक यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि पाई गई है। इसी वजह से लौंग को एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाले मसालों में शामिल किया जाता है।

सूजन कम करने वाले गुण भी मौजूद

रिसर्च में लौंग के कुछ यौगिकों में शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की क्षमता देखी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि लौंग किसी बीमारी या गंभीर सूजन का इलाज कर सकती है। शरीर में लंबे समय तक रहने वाली या ज्यादा सूजन होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

ब्लड शुगर पर क्या असर डालती है लौंग?

लौंग और ब्लड शुगर को लेकर भी वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। एक छोटे अध्ययन में 13 स्वस्थ और प्री-डायबिटिक लोगों को 30 दिनों तक रोजाना 250 मिलीग्राम पानी में घुलने वाला लौंग पॉलीफेनॉल एक्सट्रैक्ट दिया गया। अध्ययन में खाने से पहले और बाद के ब्लड ग्लूकोज स्तर में कमी देखी गई।

हालांकि, इस अध्ययन में सामान्य लौंग नहीं बल्कि एक विशेष लौंग एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल किया गया था और प्रतिभागियों की संख्या भी बहुत कम थी। इसलिए इन नतीजों के आधार पर लौंग को डायबिटीज की दवा या इलाज नहीं माना जा सकता।

बैक्टीरिया और फंगस के खिलाफ भी दिखे गुण

लौंग में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों में एंटीमाइक्रोबियल और एंटीफंगल गुण भी पाए गए हैं। प्रयोगशाला स्तर पर हुए अध्ययनों में लौंग के कुछ घटकों ने बैक्टीरिया और फंगस की वृद्धि को प्रभावित किया है। हालांकि, इन गुणों के आधार पर किसी संक्रमण का घरेलू इलाज करना उचित नहीं है।

ध्यान रखें: लौंग सामान्य मात्रा में मसाले के तौर पर भोजन का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इसका अधिक सेवन या लौंग के तेल का सीधे इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर किसी बीमारी, दवा के सेवन या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में लौंग का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

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