नई दिल्ली, 20 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले दुनियाभर में धार्मिक आज़ादी पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था ‘यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ (USCIRF) ने RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
USCIRF का आरोप है कि RSS धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले को बढ़ावा देता है। दरअसल, पाकिस्तान में जन्मे अमेरिकी नागरिक आसिफ महमूद यूएससीआईआरएफ के प्रमुख हैं और वह अपने देश के राजनीतिक व कूटनीतिक नेताओं के साथ करीबी संबंध बनाए हुए हैं।
आसिफ महमूद की लीडरशिप में यूएससीआईआरएफ ने बार-बार भारत पर ‘धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न’ का आरोप लगाया है। महमूद के अलग-अलग पार्टियों के पाकिस्तानी नेताओं के साथ करीबी संबंध रहे हैं और उन्होंने कश्मीर के लिए लॉबिंग भी की है।
यूएससीआईआरएफ ने एक्स पर एक पोस्ट में कमिश्नर जीन मिल्स का एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, अमेरिका में हाई-लेवल मीटिंग या डिप्लोमैटिक शिष्टाचार का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बयान में कहा गया, ‘इसके बजाय, यूएसजी (अमेरिकी सरकार) को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं।’
Cmmr @Gene_Mills: “RSS leaders, even when affiliated with the Indian gov’t, should not be honored with high-level meetings or diplomatic courtesies. Instead, the USG should focus on imposing sanctions on RSS members found responsible for FoRB violations.” https://t.co/q5XuXTKsgF
— USCIRF (@USCIRF) August 19, 2026
कमीशन ने अपने चेयरमैन आसिफ महमूद का बयान भी जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा, ‘भारत के पीएम मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं। आरएसएस एक भारतीय अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन है, जिसके सब-ग्रुप्स ने ईसाइयों और मुसलमानों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब आरएसएस नेता मोहन भागवत अमेरिका का दौरा करने वाले हैं।’
दिलचस्प तथ्य यह है कि ये बयान ऐसे समय में आए हैं, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया और कहा कि अमेरिका इस पूर्व राज्य के लिए अपनी उच्चतम-स्तरीय यात्रा चेतावनी (travel warning) को कम करने पर फिर से विचार करेगा।
देखने को तो कागजों पर यूएससीआईआरएफ एक स्वतंत्र संस्था है, जिसका काम दुनियाभर में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर नज़र रखना है। लेकिन इसके कमिश्नरों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और रिपब्लिकन व डेमोक्रेटिक पार्टियों के नेतृत्व द्वारा की जाती है। यह ढांचा इसलिए बनाया गया है ताकि कमीशन का चरित्र दोनों पार्टियों के प्रति निष्पक्ष और तटस्थ बना रहे।


