अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने पीएम मोदी से की बात, भारत-अमेरिका सहयोग पर हुई अहम चर्चा
नई दिल्ली, 8 अगस्त। अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार की रात (भारतीय समयानुसार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-अमेरिका सहयोग पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर यह जानकारी दी। पीएम मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी को बेटे के जन्म की बधाई भी दी।
जेडी वेंस और उनकी पत्नी को बेटे के जन्म की बधाई भी दी
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन कॉल आया। हमने भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को अहम क्षेत्रों में और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उनके और ‘सेकेंड लेडी’ को बेटे के जन्म पर गर्मजोशी से बधाई दी और पूरे परिवार को शुभकामनाएं दीं।’
Received a phone call from US Vice President JD Vance. We discussed ways to further deepen India-US Comprehensive Global Strategic Partnership across key areas.
Warmly congratulated him and the Second Lady on the birth of their son and conveyed best wishes to the entire family.…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 8, 2026
अमेरिकी सीनेट में पास हुआ बिल
उल्लेखनीय है कि दोनों नेताओं के बीच ऐसे समय यह बातचीत हुई है, जब एक दिन पहले शुक्रवार को ही अमेरिकी सीनेट ने दोनों पार्टियों के समर्थन वाला एक बिल पास किया। यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों (जैसे भारत और चीन) से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है, जो रूस से तेल और गैस का आयात जारी रखते हैं। इसके पीछ तर्क यह दिया जा रहा है कि ऐसा व्यापार मॉस्को की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने और यूक्रेन में उसके सैन्य अभियानों के लिए फंड जुटाने में मदद करता है।
‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट‘ को भारी बहुमत से मंजूरी
सीनेट ने भारी बहुमत (86-11 वोट) से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को मंजूरी दी। दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (जो इसके मुख्य निर्माताओं में से एक थे) के नाम पर रखे गए इस कानून का मकसद रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। साथ ही उन देशों को भी निशाना बनाना है, जिनके मॉस्को के साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा व्यापार संबंध हैं। इस कानून के प्रावधानों के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार मिलेगा कि वे रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के दुनिया के शीर्ष पांच खरीदारों से होने वाले आयात पर 100% तक टैरिफ लगा सकें।
रूसी अर्थव्यवस्था के सपोर्ट को कम करना लक्ष्य
विदेशी एनर्जी खरीदारों को टारगेट करने के अलावा, यह कानून रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, सीनियर पॉलिटिकल और मिलिट्री अधिकारियों, फाइनेंशियल संस्थानों, एनर्जी प्रोजेक्ट्स और रूस की युद्ध कोशिशों से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंधों की रूपरेखा तैयार करता है। यह कानून उन पुराने और री-फ्लैग्ड (झंडा बदले हुए) ऑयल टैंकरों पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाता है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर रूस ग्लोबल प्रतिबंधों से बचने और एनर्जी एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई को बनाए रखने के लिए करता है। इसका व्यापक मकसद रूस की इकॉनमी और मिलिट्री कैंपेन को सपोर्ट करने वाले फाइनेंशियल फ्लो को रोकना है।
रूसी तेल के खरीदारों पर लग सकता है टैरिफ
यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल या नेचुरल गैस के टॉप पांच खरीदारों से इम्पोर्ट किए जाने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। चीन के साथ-साथ भारत भी दुनिया भर में रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। इस कदम का मकसद एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों के सामने एक विकल्प रखना है : या तो वे रियायती दरों पर रूसी एनर्जी खरीदना जारी रखें या फिर फायदेमंद अमेरिकी बाजार तक अपनी पहुंच बनाए रखें।
गौरतलब है कि 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद, ग्लोबल बाजार में उथल-पुथल के दौरान अपनी राष्ट्रीय एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी।
