लखनऊ, 16 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में 3002.99 करोड़ रुपये के सरकारी कार्यों से जुड़ी जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (GS Express Pvt. Ltd.) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कंपनी का अनुभव प्रमाण पत्र कथित तौर पर फर्जी पाए जाने के बाद नियोजन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में ईपीसीसी मिशन के तकनीकी प्रकोष्ठ ने कंपनी को ठेका रद्द करने संबंधी नोटिस जारी करते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे प्रदेश में चल रही कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के प्रभावित होने की आशंका है। इनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का महत्वाकांक्षी गोरखपुर वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट भी शामिल है।
41 परियोजनाओं के मिले हैं कार्यादेश
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जीएस एक्सप्रेस को प्रदेश में कुल 3002.99 करोड़ रुपये की लागत के 41 कार्य सौंपे गए हैं। इनमें से 1818.01 करोड़ रुपये के कार्य कंपनी द्वारा अन्य एजेंसियों से कराए जाने का आरोप है। इस व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में कथित तौर पर कंपनी को संरक्षण देने वाले अधिकारियों और नेताओं के गठजोड़ की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है।
शिकायत मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नियोजन, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और संबंधित कार्यदायी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होने की बात कही जा रही है। यह मामला प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी ने पहले भी वापस लिया था कार्यादेश
मामले में लोक निर्माण विभाग पहले ही कंपनी को जारी कार्यादेश वापस ले चुका है। संबंधित फैसले में यह भी उल्लेख किया गया था कि निविदा दस्तावेजों में कंपनी ने भविष्य में पीडब्ल्यूडी की निविदाओं में भाग लेने से स्थायी रूप से वंचित किए जाने की शर्त स्वीकार की थी। बताया गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा अदालत के तत्कालीन आदेश का पालन नहीं किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
जांच और कार्रवाई पर टिकी नजरें
कंपनी के अनुभव प्रमाण पत्र की वैधता, उसे दिए गए सरकारी ठेकों और अन्य एजेंसियों से कराए जा रहे कार्यों को लेकर उठे सवालों के बीच अब जांच और संभावित कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे संबंधित सरकारी परियोजनाओं और ठेका प्रक्रिया पर व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।


