यूपी पंचायत चुनाव पर सस्पेंस बरकरार, हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार की नजर; सुप्रीम कोर्ट जाएगा प्रधान संगठन

लखनऊ, 16 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सियासी और कानूनी सरगर्मी तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के आदेश के बाद प्रदेश सरकार फूंक-फूंककर कदम उठा रही है। शासन स्तर पर आदेश का अध्ययन किया जा रहा है और आगे की रणनीति तय करने के लिए विधिक राय ली जा रही है। इस बीच राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। ऐसे में पंचायत चुनाव की समयसीमा और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा अहम हो गया है।

हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ले रही कानूनी सलाह

प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र ने गुरुवार को विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर हाईकोर्ट के आदेश पर चर्चा की। वहीं, विभागीय मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी कहा कि सरकार इस मामले में विधिक राय ले रही है। कानूनी सलाह मिलने के बाद ही सरकार के अगले कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंचायत चुनाव की तैयारियों और निर्धारित समयसीमा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सरकार के फैसले पर राजनीतिक दलों, पंचायत प्रतिनिधियों और चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की नजरें टिकी हैं।

ओबीसी आरक्षण के ट्रिपल टेस्ट का दिया जाएगा हवाला

राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह के मुताबिक, संगठन अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की तैयारी कर रहा है। संगठन की ओर से ओबीसी आरक्षण निर्धारित करने के लिए जरूरी ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया और पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का मुद्दा उठाया जाएगा। संगठन का तर्क है कि पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पूरी की जानी चाहिए। इसी आधार पर संगठन सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगने की तैयारी में है।

33 जिलों का दौरा नहीं कर पाया पिछड़ा वर्ग आयोग

संगठन के अनुसार, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग अभी तक 33 जिलों का दौरा नहीं कर पाया है। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट तैयार करने और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करने में समय लगने की आशंका जताई जा रही है। संगठन का कहना है कि आरक्षण की प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कराने से संबंधित कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति अदालत के निर्णय और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

पंचायत चुनाव को लेकर विपक्ष भी हमलावर

पंचायत चुनाव में संभावित देरी को लेकर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। विपक्षी दल सरकार पर चुनाव टालने की कोशिश करने का आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव को लेकर देरी की जा सकती है। वहीं, सरकार की ओर से फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर विधिक राय लेने की बात कही जा रही है। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम और प्रधान संगठन की सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित अपील पर हैं। आने वाले दिनों में होने वाली कानूनी कार्रवाई से ही यह साफ होगा कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी और ओबीसी आरक्षण को लेकर क्या व्यवस्था तय होती है।

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