नकली दवाओं के कारोबार पर यूपी सरकार का शिकंजा, लाइसेंस से बैंक खाते तक होगी जांच

लखनऊ, 25 अगस्त: नकली, मिलावटी और नशीली दवाओं का कारोबार करने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। अब मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर संदिग्ध दवाएं जब्त करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। एफएसडीए दवा के लाइसेंस, गोदाम, बिलिंग, बैंक खाते, डिजिटल रिकॉर्ड और पूरी सप्लाई चेन की जांच करेगा। जांच का दायरा नकली दवा बेचने वाले कारोबारी से लेकर उसके सप्लायर और निर्माता तक पहुंचेगा। डमी व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस लेकर कारोबार करने, फर्जी बिलिंग करने और दवाओं का स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ लाइसेंस निरस्त करने के साथ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई भी की जाएगी।

दुकान से आगे बढ़ेगी एफएसडीए की जांच

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी एसओपी में औषधि निरीक्षकों और अनुज्ञापन प्राधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि जांच सिर्फ दवा की दुकान तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारी यह पता लगाएंगे कि दवा कहां से आई, किसने खरीदी, किसे बेची गई और भुगतान किस बैंक खाते से हुआ। यानी संदिग्ध दवा मिलने पर उसकी पूरी सप्लाई चेन को जोड़ा जाएगा। नया थोक औषधि लाइसेंस लेने वालों की पृष्ठभूमि भी खंगाली जाएगी। यदि पहले अवैध दवा कारोबार में शामिल रहा कोई व्यक्ति पत्नी, भाई, बहन, माता-पिता, रिश्तेदार या किसी डमी व्यक्ति के नाम पर दोबारा लाइसेंस लेने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

डमी के नाम लाइसेंस, कारोबार किसी और का तो भी कार्रवाई

गंभीर उल्लंघन करने वाले कारोबारियों को लाइसेंस से डिबार किया जाएगा। उनके बिजनेस पार्टनर और एसोसिएट की भूमिका की भी जांच होगी। यदि लाइसेंस किसी महिला या दूसरे व्यक्ति के नाम पर है, लेकिन वास्तविक कारोबार कोई और चला रहा है, तो यह भी जांच के दायरे में आएगा। बैंक खाता, जीएसटी और दूसरे कारोबारी दस्तावेज लाइसेंसधारी के नाम होने की भी जांच की जाएगी। दवाओं का अवैध स्टॉक दुकान के बजाय बेसमेंट, मकान या किराए के कमरे में छिपाकर रखा गया है तो उसे भी कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा।

बिलिंग सॉफ्टवेयर और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे

एफएसडीए की जांच अब बिलिंग सॉफ्टवेयर और डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंचेगी। माइनस स्टॉक, बैकडेटेड बिल, डेटा डिलीट करना, दोहरे खाते चलाना और वास्तविक स्टॉक छिपाना जैसी गतिविधियों की पड़ताल की जाएगी। छापेमारी के दौरान सीसीटीवी डीवीआर, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रसीद, बैच नंबर, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान सुरक्षित किए जाएंगे। बैंक ट्रांजेक्शन की जांच कर कागजों पर दिखाए गए कारोबार और वास्तविक लेनदेन का मिलान किया जाएगा।

स्टॉक में एक गोली का भी देना होगा हिसाब

डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक्स, कैंसर और पेन किलर जैसी फास्ट मूविंग और हाई-वैल्यू दवाओं के कागजी और वास्तविक स्टॉक का मिलान होगा। स्टॉक में अंतर मिलने पर दवा के स्रोत की जांच शुरू होगी। एक ही फर्म से दवा खरीदकर उसी को वापस बेचने, असामान्य रूप से कम कीमत पर दवा बेचने, क्रॉस बिलिंग और कागजों में स्टॉक एडजस्ट करने जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी। दूसरे राज्यों से आने वाली संदिग्ध दवाओं के मामले में संबंधित राज्य के औषधि निरीक्षकों के जरिए निर्माता और सप्लायर का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यानी संदिग्ध दवा की एक खेप मिलने पर पूरी सप्लाई चेन जांच के घेरे में आ सकती है।

सरकारी सप्लाई की दवाओं को बाजार में बेचने वालों पर भी कार्रवाई

सरकारी सप्लाई, ईएसआई, डिफेंस सप्लाई, फिजिशियन सैंपल या एक्सपायर्ड दवाओं को दोबारा लेबल कर बाजार में बेचने वालों के खिलाफ भी सख्ती होगी। इंसुलिन और वैक्सीन जैसी कोल्ड चेन दवाओं के भंडारण में निर्धारित तापमान का पालन जरूरी होगा। 2 से 8 डिग्री सेल्सियस की निर्धारित सीमा से बाहर दवाएं मिलने पर स्टॉक कब्जे में लेकर कार्रवाई की जाएगी। कई फर्मों के बीच बिलिंग लूप या संगठित कॉकस मिलने पर पूरे नेटवर्क की एक साथ जांच की जाएगी।

नशीली दवाओं के नेटवर्क पर भी दोहरा वार

कोडीन सिरप, पेन किलर और एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध कारोबार पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। जांच में संगठित नेटवर्क सामने आने पर मामला सिर्फ औषधि कानून तक सीमित नहीं रहेगा। मामले के तथ्यों के आधार पर बीएनएस, 2023 और एनडीपीएस कानून की संबंधित धाराओं में भी मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। काउंटरफीट या स्प्यूरियस दवा मिलने अथवा गंभीर अनियमितता पाए जाने पर बिक्री और वितरण तत्काल रोकने, स्टॉक सीज करने और लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। लाइसेंस निरस्त होने के बाद संबंधित फर्म से दवाओं की खरीद-बिक्री पूरी तरह बंद कराई जाएगी। वहीं, वैध खरीद अभिलेख नहीं मिलने पर पूरा स्टॉक राजकीय अभिरक्षा में लिया जाएगा।

अब दवा कारोबारी से निर्माता तक जुड़ेगी हर कड़ी

नई व्यवस्था में नकली दवा के खिलाफ कार्रवाई का फोकस सिर्फ मेडिकल स्टोर तक सीमित नहीं रहेगा। निर्माता से सप्लायर और थोक कारोबारी से लेकर रिटेलर तक पूरी सप्लाई चेन की जांच की जाएगी। इससे फर्जी बिलिंग, डमी लाइसेंस, छिपे हुए स्टॉक, संदिग्ध बैंक लेनदेन और नकली या नशीली दवाओं के संगठित नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिलेगी।

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