शुभेंदु सरकार का नया आदेश : पश्चिम बंगाल में अब सभी मदरसों में वंदे मातरम गाना जरूरी
कोलकाता, 21 मई। पश्चिम बंगाल में शभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने नया आदेश जारी कर दिया है। इसके तहत स्कूलों के बाद अब राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह नया निर्देश राज्य सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों में वंदे मातरम गाना जरूरी करने के ठीक एक हफ्ते बाद आया है। सरकारी आदेश के अनुसार यह नियम सरकारी मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त और बिना सहायता प्राप्त मदरसों पर तुरंत लागू होगा। बुधवार (19 मई) को जारी नए आदेश के बाद अब कक्षा शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा (असेंबली) में वंदे मातरम गाना जरूरी होगा.
देखा जाए तो पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्यभर के मदरसों में वंदे मातरम गाने के नियम को बढ़ा दिया है, जिससे माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन डिपार्टमेंट के तहत आने वाले सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों में सुबह की असेंबली में राष्ट्रीय गीत गाना ज़रूरी हो गया है।
इससे पहले मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और कवि गुलाम मुस्तफा की ‘अनंत असीम प्रेममय तुमी’ (बांग्ला गीत) गाया जाता था। अब सभी मदरसों को इस आदेश को लागू करने के बाद इसकी रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी।
कुल मिलाकर देखें तो शुभेंदु अधिकारी की सरकार का शिक्षा से जुड़ा यह एक और बड़ा फैसला माना जा रहा है। इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था, ‘पिछले निर्देश को पलटते हुए, पश्चिम बंगाल सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी स्कूलों के लिए तुरंत प्रभाव से यह जरूरी कर दिया है कि वे क्लास शुरू होने से पहले स्कूल असेंबली या सुबह की प्रार्थना के दौरान भारतीय राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाएं।’
उल्लेखनीय है कि वंदे मातरम दशकों से भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक बातचीत में एक मजबूत निशानी रहा है। ब्रिटिश राज के खिलाफ भारत की लड़ाई के दौरान आजादी के लिए लड़ने वालों ने इस गाने का बहुत इस्तेमाल किया और बाद में यह राष्ट्रवादी आंदोलनों से भी जुड़ गया।
विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा फिर राजनीतिक सुर्खियों में आ गया
गत फरवरी में केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के बराबर दर्जा दिया था। उस फैसले के बाद सरकारी कार्यक्रमों और स्कूल के कार्यक्रम में राष्ट्रगान के साथ इस गाने के सभी छह छंदों को गाना जरूरी हो गया। इस घटना से अलग-अलग राज्यों और राजनीतिक पार्टियों में नई बहस शुरू हो गई।
