‘रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले – सिर्फ प्रोडक्शन तक ही सीमित न रहे डीआरडीओ और इंडस्ट्री के बीच सहयोग

नई दिल्ली, 15 सितम्बर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यहां DRDO–Industry Synergy Meet ‘VIMARSH 2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए सिर्फ डीआरडीओ और इंडस्ट्री के बीच सहयोग सिर्फ प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इसे रिसर्च, डिज़ाइन, टेस्टिंग, सर्टिफ़िकेशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसी पूरी वैल्यू चेन तक बढ़ाना चाहिए।

DRDO–Industry Synergy Meet ‘VIMARSH 2026’ को किया संबोधित

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य सिर्फ एक आर्थिक रूप से मज़बूत देश बनाना ही नहीं है बल्कि उसे तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित बनाना भी है। उन्होंने कहा, ‘2047 तक हमें अहम तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी, घरेलू स्तर पर बनी चीजों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा, रक्षा निर्यात में कई गुना बढ़ोतरी करनी होगी और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।”

‘2047 तक हमें अहम तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी’

रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व सुधारों का जिक्र किया। इनमें ‘पॉजिटिव इंडिजनाइजेशन लिस्ट (Positive Indigenisation List) की घोषणा, ‘मेक इन इंडिया’ पहल, iDEX, ADITI और आयात पर निर्भरता कम करने व आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने के लिए रक्षा R&D बजट का 25% हिस्सा निजी क्षेत्र को आवंटित करने का फैसला शामिल है।

अब टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड के जरिए स्टार्ट-अप्स को ग्रांट दी जा रही

उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड के जरिए स्टार्ट-अप्स को ग्रांट दी जा रही है और कई टेक्नोलॉजी पहले ही प्रोडक्शन के स्टेज तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि iDEX ने डिफेंस इनोवेशन के लिए एक नया इकोसिस्टम भी बनाया है, जहां स्टार्ट-अप्स असल ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर समाधान विकसित कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा, “DRDO के पास ज्ञान और टेक्नोलॉजी है तो इंडस्ट्री के पास बड़े पैमाने पर काम करने और मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है, स्टार्ट-अप्स इनोवेशन और तेजी लाते हैं, और युवाओं के मन में ‘नए भारत’ का सपना है। जब ये चारों ताकतें एक साथ मिलकर आगे बढ़ती हैं, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।”

ड्रोन, एआई और साइबर सिक्योरिटी को भविष्य के युद्ध के लिए अहम क्षेत्र

रक्षा मंत्री ने ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और साइबर सिक्योरिटी को भविष्य के युद्ध के लिए अहम क्षेत्र बताया। उन्होंने स्टार्टअप्स से इन क्षेत्रों में अवसरों को पहचानने, इनोवेशन को तेज करने और भारत की तकनीकी व रणनीतिक ताकत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपील की।

कई अहम पॉलिसी पहल की शुरुआत

राजनाथ सिंह ने इस दौरान कई अहम पॉलिसी पहल की शुरुआत की। इन पहलों में MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी और वित्तीय रुकावटों को कम करने का एक व्यापक ढांचा शामिल है। इसमें उन्हें सीधे फंडिंग, इनक्यूबेशन सपोर्ट और DRDO की टेस्टिंग सुविधाओं का खास एक्सेस देने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही, सॉफ्टवेयर-आधारित रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और पुराने हो रहे सिस्टम के मैनेजमेंट के लिए, DRDO द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर सोर्स कोड को लाइसेंस-प्राप्त इंडस्ट्रीज़ के साथ शेयर करने के लिए एक स्टैंडर्ड और सुरक्षित ढांचा भी लॉन्च किया गया।

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