SCO Summit : गुटेरेस ने वैश्विक शासन में सुधार का किया आह्वान, बोले- बदलती दुनिया के अनुरूप हो व्यवस्था

बिश्केक, 7 सितंबर। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के नेताओं से वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय हो रही है और इस बदलाव का इस्तेमाल अधिक प्रतिनिधित्व वाली तथा न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं बनाने के लिए किया जाना चाहिए। किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गुटेरेस ने कहा कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बहुपक्षवाद को मजबूत करने, वैश्विक न्याय बढ़ाने और विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक मजबूती देने का अवसर प्रदान करती है।

  • ‘बहुध्रुवीय दुनिया अच्छी बात है’

यूएन महासचिव ने कहा कि दुनिया लगातार अधिक बहुध्रुवीय होती जा रही है और यह सकारात्मक बदलाव है। उन्होंने बहुध्रुवीयता को वैश्विक शासन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में न्याय के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि यह प्रभावी बहुपक्षवाद की मजबूत नींव बन सकती है। गुटेरेश ने कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़े बदलाव आ चुके हैं, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अभी भी वर्ष 1945 की भू-राजनीतिक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करती हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और ब्रेटन वुड्स संस्थाओं समेत बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सुधारों का उद्देश्य विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व और उनका प्रभाव बढ़ाना होना चाहिए, ताकि अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था बनाई जा सके।

  • SCO और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर

गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र और SCO के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग की सराहना की। उन्होंने SCO को बहुपक्षवाद का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और चार प्रमुख क्षेत्रों में दोनों संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

1. वैश्विक शांति और सुरक्षा

मध्य पूर्व की स्थिति पर चिंता जताते हुए गुटेरेस ने युद्धविराम और समझौतों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून और समझौतों का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने गाजा में युद्धविराम का सम्मान करने, मानवीय सहायता की राह में आने वाली बाधाओं को हटाने और पश्चिमी तट में बस्तियों के विस्तार तथा बस्तीवासियों के हमलों को रोकने की अपील दोहराई।

गुटेरेस ने कहा कि स्थायी शांति का रास्ता दो-राष्ट्र समाधान से होकर जाता है, जिसमें इजराइल और फिलिस्तीन दो स्वतंत्र, संप्रभु और लोकतांत्रिक देशों के रूप में शांति और सुरक्षा के साथ रहें। यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने तत्काल और पूर्ण युद्धविराम की अपील करते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप न्यायपूर्ण और टिकाऊ शांति के लिए बातचीत का रास्ता खुल सकता है।

2. विकास के लिए वित्तीय सहायता

यूएन महासचिव ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई विकासशील देश भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं। उन्होंने वैश्विक वित्तीय ढांचे में अधिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने तथा कर्ज संकट से प्रभावी तरीके से निपटने का आह्वान किया। बहुपक्षीय विकास बैंकों से भी विकासशील देशों के लिए बड़े और प्रभावी कदम उठाने की अपील की।

3. जलवायु परिवर्तन से निपटने की कार्रवाई

गुटेरेस ने जलवायु परिवर्तन को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान सीमा को पार करने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेजी से कटौती करने और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दिया। विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त बढ़ाने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि जलवायु कार्रवाई के साथ जलवायु न्याय भी जरूरी है। महासचिव ने महत्वपूर्ण खनिजों के जिम्मेदार प्रबंधन और संसाधन संपन्न देशों को उनके प्राकृतिक संसाधनों से अधिक लाभ सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी बताई।

4. AI का लाभ सभी देशों तक पहुंचाने पर जोर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर गुटेरेस ने कहा कि इसके फायदे केवल कुछ देशों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। AI का लाभ दुनिया के सभी देशों और समाजों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने इसके लिए प्रभावी सुरक्षा उपायों और अधिक समावेशी वैश्विक AI शासन व्यवस्था की आवश्यकता बताई।

  • ईरान के राष्ट्रपति से भी मिले गुटेरेस

SCO शिखर सम्मेलन से इतर एंतोनियो गुटेरेस ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता के अनुसार, बैठक में ईरान में जारी हिंसक टकराव और उसके क्षेत्रीय तथा व्यापक मानवीय एवं आर्थिक प्रभावों पर चर्चा हुई। गुटेरेस ने बातचीत और कूटनीति के जरिए संकट का जल्द समाधान निकालने पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्ण सम्मान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास अंतरराष्ट्रीय नौवहन अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं की रक्षा की आवश्यकता भी दोहराई। उन्होंने व्यापक और टिकाऊ समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन देने की संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता दोहराई।

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