लखनऊ, 30 जून। अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद पर अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने चढ़ावे में कथित चोरी, गबन और हेराफेरी की खबरों को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील भी की।
‘दोषियों को बख्शा न जाए, लेकिन राजनीति भी न हो’
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी चोरी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं की लगातार सामने आ रही खबरें बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक रंग देना भी उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचने के लिए देश के अन्य प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन और लेखा-जोखा की जो पारदर्शी व्यवस्था लागू है, उसी तरह की प्रणाली अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भी अपनाई जानी चाहिए।
धर्म और राजनीति को अलग रखने की अपील
बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में राजनीति का अपराधीकरण, अपराध का राजनीतिकरण, धर्म का राजनीतिकरण और राजनीति का अंध-धर्मीकरण लोकतंत्र और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों से जनहित और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की सलाह दी और लोगों से भी इस मुद्दे के राजनीतिकरण से बचने की अपील की।
22 जून को ब्राह्मण समाज को लेकर भी दिया था बयान
इससे पहले 22 जून को मायावती ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में दावा किया था कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के तहत बसपा ने ब्राह्मण समाज सहित अपर कास्ट के लोगों को अधिक प्रतिनिधित्व देना शुरू किया है, जिससे विरोधी दल, विशेषकर समाजवादी पार्टी, असहज हो गई है। उन्होंने कहा था कि वर्ष 2007 की तरह इस बार भी ब्राह्मण समाज के समर्थन से बसपा पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकती है। मायावती ने यह भी दावा किया कि ‘ब्राह्मण समाज का हित बसपा में ही सुरक्षित है’, क्योंकि उनकी पार्टी ने हमेशा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम किया है और सभी वर्गों को सम्मान एवं भागीदारी दी है।
क्या है राम मंदिर चढ़ावा विवाद?
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर हाल के दिनों में विवाद सामने आया है। चढ़ावे की गिनती, रखरखाव और लेखा-जोखा में कथित अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, कितनी धनराशि प्रभावित हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। इस मामले को लेकर विपक्ष सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से चल रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के अनुसार सख्त सजा दी जाएगी।

