लोकसभा में राहुल गांधी का मजाकिया अंदाज : ‘प्रधानमंत्री और मेरे बीच पत्नी को लेकर कोई समस्या नहीं’
नई दिल्ली, 17 अप्रैल। लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर चल रही तीखी बहस के दौरान शुक्रवार को एक हल्का-फुल्का क्षण तब सामने आया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने खुद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अविवाहित होने का जिक्र किया। उन्होंने हंसी-मजाक के बीच कहा – ‘प्रधानमंत्री और मेरे बीच पत्नी को लेकर कोई समस्या नहीं है…।’
परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने संबंधी विधेयकों को पारित करने के लिए बुलाए गए विशेष सत्र के दूसरे दिन राहुल गांधी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ‘हम सभी इस कमरे में मौजूद हर एक व्यक्ति, अपने जीवन में मौजूद महिलाओं, माताओं, बहनों और पत्नियों से प्रभावित हुए हैं। उनसे बहुत कुछ सीखा है और उनसे बहुत कुछ प्राप्त किया है, जैसा कि रिजिजू जी ने कहा है। बेशक, प्रधानमंत्री और मेरे पास वह पत्नी का साथ नहीं है, इसलिए हमें वह जानकारी नहीं मिलती। लेकिन हमारे पास हमारी माताएं और बहनें हैं। कल मैं बैठा अपनी बहन को पांच मिनट में वह सब कर दिखाने में कामयाब होते देख रहा था, जो मैं शायद अपने 20 वर्षों के राजनीतिक करिअर में नहीं कर पाया।’
🔹 This is not a women’s Bill.
🔹 It's an attempt to change the electoral map of India, using and hiding behind India’s women.
🔹 I want to assure my friends, brothers, and sisters across the country – do not worry. We are not going to allow them to attack the Union of India.… pic.twitter.com/ppe6S4iHjQ
— Congress (@INCIndia) April 17, 2026
महिलाओं को कदापि सशक्त नहीं बनाएगा महिला आरक्षण विधेयक
महिला आरक्षण विधेयक के विरोध में बोलते हुए राहुल गांधी ने सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि यह विधेयक महिलाओं को सशक्त बनाएगा। उन्होंने कहा, ‘इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है। यह भारत के चुनावी नक्शे को बदलने का प्रयास है। वास्तव में, यह एक शर्मनाक हरकत है।”
This is not a women’s Bill. pic.twitter.com/djpMIuUq0E
— Congress (@INCIndia) April 17, 2026
कांग्रेस सांसद ने चेतावनी दी कि सरकार जिस तरह से महिलाओं के लिए कोटा लागू कर रही है (संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण) वह वास्तव में परिसीमन के माध्यम से देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह एक ‘घबराहट में लिया जाने वाला फैसला’ है, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह दिखा सकें कि वे महिला समर्थक हैं। खासकर बंगाल और तमिलनाडु में मतदान से पहले, जहां महिला मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
