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बिहार में सरकारी बंगले पर छिड़ी सियासत : राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली करने से इनकार

बिहार में सरकारी बंगले पर छिड़ी सियासत : राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली करने से इनकार

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पटना, 31 मई। बिहार में एक सरकारी बंगले को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। इस क्रम में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकार की ओर से कई बार नोटिस मिलने के बावजूद पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने से इनकार कर दिया है।

डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को बंगला आवंटित

दरअसल, बिहार भवन निर्माण विभाग ने यह सरकारी बंगला डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है। वहीं राबड़ी देवी को, जो मौजूदा समय विधान परिषद में विपक्ष की नेता हैं, पिछले वर्ष नवम्बर में 39 हार्डिंग रोड स्थित एक अन्य सरकारी आवास दिया गया था। विभाग ने उन्हें वहां स्थानांतरित होने के निर्देश दिए हैं और हाल ही में जारी नोटिस में 15 दिनों के भीतर वर्तमान बंगला खाली करने को कहा है।

आवास नहीं छोड़ूंगी, सरकार चाहे तो पुलिस बल इस्तेमाल कर ले – राबड़ी देवी

फिलहाल राबड़ी देवी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह स्वेच्छा से यह आवास नहीं छोड़ेंगी। उनका कहना है कि यदि सरकार उन्हें हटाना चाहती है तो पुलिस बल का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन वह खुद से बंगला खाली नहीं करेंगी।

करीब 20 वर्षों से राबड़ी देवी व लालू प्रसाद का निवास रहा है 10 सर्कुलर रोड

उल्लेखनीय है कि 10 सर्कुलर रोड स्थित यह सरकारी बंगला करीब 20 वर्षों से राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव का निवास रहा है। यह सिर्फ एक आवास ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है। मुख्यमंत्री आवास के बिल्कुल पास होने की वजह से बिहार की राजनीति में इस पते की खास पहचान रही है।

भाजपा नीत एनडीए सरकार का कथन

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का कहना है कि राबड़ी देवी को कई महीने पहले ही दूसरा सरकारी आवास आवंटित कर दिया गया था। इसके बावजूद वह निर्धारित समय के बाद भी पुराने बंगले में रह रही हैं।

राजद नेताओं ने इसे राजनीतिक कारणों से लिया गया फैसला करार दिया

दूसरी तरफ राजद नेताओं ने इस काररवाई का विरोध किया है। उनका आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक कारणों से लिया गया है। राजद का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यादव परिवार को निशाना बनाने और राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

कुल मिलाकर देखें तो यह मामला अब सिर्फ एक सरकारी आवास का विवाद नहीं रह गया है बल्कि बिहार में भाजपा व राजद के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान का नया मुद्दा बन गया है। राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर लगातार चर्चा हो रही है और आने वाले दिनों में यह विवाद और भी गरमा सकता है।

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