संविधान संशोधन बिल गिरने पर सियासी घमासान, अमित शाह का प्रहार– 2029 में महिलाओं का आक्रोश झेलेगा विपक्ष
नई दिल्ली, 17 अप्रैल। लोकसभा में शुक्रवार को दो तिहाई बहुमत के अभाव में संविधान का 131वां संशोधन विधेयक गिरने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है और राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
सत्तापक्ष जहां इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर विपक्ष को घेर रहा है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर अपने तर्क दे रहा है। इस क्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि उसे 2029 में महिलाओं का आक्रोश झेलना पड़ेगा।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन को कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया।
आज लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है।
अब…
— Amit Shah (@AmitShah) April 17, 2026
बिल को गिराना निंदनीय
उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले इस बिल को गिराना निंदनीय है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका राजनीतिक असर दूर तक जाएगा और विपक्ष को 2029 के लोकसभा चुनाव सहित हर चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
नड्डा ने बताया ‘काला अध्याय’
वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिल का पारित न होना लोकतंत्र के लिए ‘काला अध्याय’ है। उन्होंने विपक्ष पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया और कहा कि इससे करोड़ों महिलाओं के सपनों को झटका लगा है।
महिला सशक्तीकरण पर टकराव
नड्डा ने कहा कि जहां एक ओर सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं विपक्ष की सोच उनकी प्रगति में बाधा बन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नारी शक्ति का यह आक्रोश आने वाले चुनावों में दिखाई देगा।
जीतन राम मांझी का भी तीखा बयान
जीतन राम मांझी ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बिल का गिरना नहीं, बल्कि देश की बेटियों के सपनों और उम्मीदों को तोड़ने जैसा है। उन्होंने इसे शर्मनाक करार दिया।
