नई दिल्ली, दो अक्टूबर। केंद्र सरकार ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (RoDTEP) योजना को 31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ा दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से 30 सितम्बर की जारी अधिसूचना के अनुसार यह योजना घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) की इकाइयों, अग्रिम प्राधिकरण (एए) धारकों, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) की इकाइयों और निर्यातोन्मुखी इकाइयों (ईओयू) द्वारा किए गए निर्यात पर उपलब्ध होगी।
आरओडीटीईपी योजना निर्यातित उत्पादों पर वहन किए गए ऐसे अंतर्निहित, प्रतिपूर्ति से वंचित केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्कों, करों तथा उपकरों की वापसी करती है, जिनमें पूर्ववर्ती चरणों के संचित अप्रत्यक्ष कर भी शामिल हैं। 30 सितम्बर, 2026 को यथालागू परिशिष्ट 4आर और परिशिष्ट 4आरई में अधिसूचित मौजूदा आरओडीटीईपी दरें और मूल्य सीमाएं उपर्युक्त अवधि के दौरान अपरिवर्तित रहेंगी।
उपरोक्त उपाय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले समान अवसर सुनिश्चित करते हुए निर्यातकों को सहायता प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निर्यात सुविधा के लिए RELIEF योजना के दूसरे घटक के तहत निर्धारित समय-सीमा भी बढ़ी
केंद्र सरकार ने इसी क्रम में निर्यात सुविधा के लिए लचीलापन और लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप-रिलीफ योजना (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) के दूसरे घटक के तहत समय-सीमा भी बढ़ा दी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम और खाड़ी तथा आसपास के क्षेत्रों में समुद्री परिवहन पर इसके प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
RELIEF योजना का घटक-II निर्यातकों को निर्दिष्ट क्षेत्रों के लिए आगामी शिपमेंट हेतु ईसीजीसी कवर प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिसमें 95 प्रतिशत जोखिम कवरेज प्रदान किया जाता है। यह घटक 16 मार्च, 2026 या उसके बाद प्राप्त की गई स्टैंडअलोन पॉलिसियों या संपूर्ण टर्नओवर पॉलिसियों के लिए उपलब्ध है। इस लाभ के तहत कवर किए जाने वाले कार्गो के प्रकारों में फुल कंटेनर लोड (एफसीएल), लेस दैन कंटेनर लोड (एलसीएल) और रीफर कंटेनर शामिल हैं (ऊर्जा शिपमेंट को छोड़कर)। इसके अतिरिक्त, रिलीफ का यह घटक सुनिश्चित करता है कि पात्र अवधि के लिए निर्यातकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम में व्यवधान से पहले के स्तर की तुलना में वृद्धि नहीं की जाएगी।
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि रिलीफ को 19 मार्च, 2026 को एक लक्षित पहल के रूप में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री गलियारे में व्यवधानों के कारण असाधारण रूप से बढ़ी माल ढुलाई लागत, बढ़े हुए बीमा प्रीमियम और युद्ध-संबंधी निर्यात जोखिमों से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को सहायता प्रदान करना था।
मंत्रालय ने कहा कि समय-सीमा बढ़ाने का उद्देश्य निर्यात क्षेत्र को मजबूत बनाए रखना, व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखना और मौजूदा भू-राजनीतिक तथा लॉजिस्टिक्स संबंधी अनिश्चितताओं के बीच निर्यातकों को सहायता देना है।


